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बस्तर में शव दफनाने पर विवाद, गांव में तनाव

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 28 July 2025

बस्तर में ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति के शव दफनाने को लेकर ग्रामीणों ने किया विरोध, गैर ईसाई समुदाय धरने पर बैठा, पुलिस तैनात।

बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में एक बार फिर धर्मांतरण को लेकर विवाद गहरा गया है। इस बार मामला एक मृतक ईसाई व्यक्ति के शव को दफनाने को लेकर है, जिसे गांव के श्मशान भूमि में दफनाने की तैयारी की जा रही थी।

गांव के गैर ईसाई समुदाय के लोगों ने इसका तीखा विरोध किया और कहा कि श्मशान भूमि केवल परंपरागत रूप से अंतिम संस्कार के लिए है, ना कि ईसाई दफन क्रिया के लिए। विवाद इतना बढ़ा कि गांव में पुलिस बल तैनात करना पड़ा, और ग्रामीण धरने पर बैठ गए

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क्या है पूरा मामला?

घटना बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के एक गांव की है, जहां एक व्यक्ति ने कुछ वर्ष पहले ईसाई धर्म स्वीकार किया था। उसकी हाल ही में मृत्यु हो गई, जिसके बाद उसके परिजनों ने उसे गांव के ही श्मशान भूमि में दफनाने की तैयारी की।

जैसे ही इसकी सूचना गांव के अन्य निवासियों को मिली, उन्होंने विरोध शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का आरोप

गांव के गैर ईसाई ग्रामीणों का कहना है कि:

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि ऐसा होने दिया गया, तो यह आगे चलकर गांव में धार्मिक ध्रुवीकरण और सांप्रदायिक तनाव को जन्म देगा।

प्रशासन की भूमिका

जैसे ही विवाद बढ़ा, स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया। मौके पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार और थाना प्रभारी मौजूद रहे। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत रहने की अपील की और स्थानीय पंचायत से मध्यस्थता कराने की प्रक्रिया शुरू की।

हालांकि, शव गांव में ही रखा हुआ है और अंतिम निर्णय आने तक दफन क्रिया को रोक दिया गया है।

परिजनों की दलील

मृतक के परिजनों का कहना है कि व्यक्ति ने स्वेच्छा से ईसाई धर्म अपनाया था और उसकी इच्छा थी कि उसे ईसाई परंपराओं के अनुसार दफनाया जाए।

क्या कहता है कानून?

भारत का संविधान धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार देता है (अनुच्छेद 25)। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म बदलता है और उसके अनुसार अंतिम संस्कार की इच्छा रखता है, तो उसे रोका नहीं जा सकता।

लेकिन भूमि का स्वामित्व और ग्राम स्तर की सामाजिक स्वीकृति एक अलग विवाद का कारण बन सकती है, जिस पर स्थानीय प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ता है

क्षेत्र में पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले

बस्तर और आसपास के आदिवासी इलाकों में धर्मांतरण एक नाजुक और विवादास्पद मुद्दा रहा है। इससे पहले भी कई बार शादी, पूजा, और मृत्यु संस्कारों को लेकर टकराव की स्थिति बन चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए संवाद और पंचायत की सहमति ज़रूरी होती है।

पुलिस और प्रशासन अलर्ट

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। पुलिस ने बताया कि:

निष्कर्ष

यह घटना एक बार फिर बताती है कि छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़ी सामाजिक जटिलताएं अभी भी गहरी हैं।

मृतक के अंतिम संस्कार से जुड़े विवाद को केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक समन्वय से ही हल किया जा सकता है।

अब यह देखना होगा कि प्रशासन किस प्रकार इस संवेदनशील मामले को सुलझाता है और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई स्थायी समाधान निकल पाता है।

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