छत्तीसगढ़ में अधिकारियों-कर्मचारियों को रंगों में बांटने की नई व्यवस्था का विरोध शुरू, कर्मचारी संघ ने रंग-कोडित आईकार्ड पर आपत्ति और चेतावनी जताई।
रायपुर।छत्तीसगढ़ में सरकारी कार्यालयों में एक नई व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासन की ओर से सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए रंग-बिरंगे फीते वाले आईकार्ड अनिवार्य किए गए हैं, जिनमें पद और जिम्मेदारी के आधार पर अलग-अलग रंग निर्धारित किए गए हैं। हालांकि, इस व्यवस्था पर अब कर्मचारी संघों ने तीखा विरोध जताया है और इसे “रंगभेद की मानसिकता” बताया है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह व्यवस्था प्रशासनिक भेदभाव को बढ़ावा देती है और ऑफिस के माहौल को अव्यवस्थित कर सकती है।
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क्या है नया कलर कोड सिस्टम
प्रशासन की तरफ से जारी आदेश के अनुसार, सरकारी विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के आईकार्ड में अब रंगों के आधार पर उनकी पदानुक्रम की पहचान की जाएगी।
प्रस्तावित रंगों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है:
- रेड (लाल): उच्च प्रशासनिक अधिकारी
- ब्लू (नीला): अनुभाग अधिकारी / सुपरवाइजर
- ग्रीन (हरा): कनिष्ठ कर्मचारी
- येलो (पीला): अनुबंध / अस्थायी कर्मचारी
इस नियम को कार्यालय की “पहचान और अनुशासन व्यवस्था” को बेहतर बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया है, लेकिन कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यह भेदभावपूर्ण और अपमानजनक है।
कर्मचारी संघ ने जताई आपत्ति
छत्तीसगढ़ शासकीय कर्मचारी महासंघ के प्रमुख राजेंद्र साहू ने इस नियम को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि:
कर्मचारी नेताओं ने यह भी कहा कि रंग-बिरंगे आईकार्ड से कर्मचारियों की सामाजिक और मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है, जिससे कार्यालय में हीन भावना और वर्ग विभाजन उत्पन्न होगा।
कुछ अधिकारियों ने भी जताई असहमत
दिलचस्प बात यह है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस व्यवस्था पर असहमति जताई है। एक विभागीय अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा:
प्रशासन का पक्ष
वहीं प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से कार्यालय की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी। विभागीय स्तर पर इसे “आंतरिक अनुशासनात्मक सुधार” का हिस्सा बताया गया है।
एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने कहा:
सोशल मीडिया पर भी शुरू हुई बहस
इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया है। कई यूज़र्स ने रंगों के आधार पर वर्गीकरण की तुलना स्कूलों में हाउस सिस्टम से की, तो कई ने इसे “नया नौकरशाही रंगभेद” कहा।
कुछ प्रतिक्रियाएं इस प्रकार हैं:
- @cg_karmachari: “रंगों से नहीं, कर्म से पहचान होनी चाहिए।”
- @voice_of_govtstaff: “हम ऑफिस में काम करने आए हैं, रंग दिखाने नहीं!”
क्या हो सकता है आगे?
कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि अगर शासन ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो वे आने वाले सप्ताह में काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे और काम बंद आंदोलन की भी चेतावनी दी गई है।
संघ की मांग है कि आईकार्ड सभी के लिए एक जैसे हों, ताकि ऑफिस में समानता और एकता बनी रहे।
निष्कर्ष
सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की पहचान और जवाबदेही तय करना जरूरी है, लेकिन उसका तरीका सम्मानजनक और भेदभाव रहित होना चाहिए। रंगों के आधार पर पद विभाजन भले प्रशासनिक सुविधा के लिए हो, लेकिन इससे कर्मचारियों की भावना आहत हो रही है।
अब देखना यह होगा कि शासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है – क्या आदेश में बदलाव होगा या विरोध की आग और भड़केगी।
