कांग्रेस ने जिला अध्यक्ष चयन में नई प्रणाली अपनाई। पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और हाईकमान समीक्षा अब मुख्य मानदंड, सिफारिश और गुट समर्थन नहीं।
रायपुर | कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के तहत जिला अध्यक्षों के चयन में बड़ा बदलाव किया है। अब यह प्रक्रिया केवल सिफारिशों पर नहीं बल्कि पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर आधारित होगी।


नई प्रणाली के अंतर्गत पर्यवेक्षक प्रत्येक जिले का दौरा करेंगे और दावेदारों की संगठनात्मक सक्रियता, कार्यशैली, जनाधार और छवि का आकलन करेंगे। इसके बाद वे हर दावेदार की सकारात्मक और नकारात्मक रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसी आधार पर 3 से 6 नामों का पैनल बनाकर हाईकमान को सौंपा जाएगा।
प्रदेश प्रभारी और पीसीसी अध्यक्ष की राय को महत्व मिलेगा, लेकिन अंतिम निर्णय पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और हाईकमान की समीक्षा पर ही आधारित रहेगा। इस बदलाव से निष्क्रिय जिला अध्यक्षों की स्थिति कमजोर हो गई है, जबकि सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं के लिए यह प्रक्रिया नया अवसर लेकर आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी चुनावी तैयारी का हिस्सा है। यदि जिला स्तर पर संगठन मज़बूत होगा तो पार्टी न केवल अपना जनाधार बढ़ा पाएगी, बल्कि विपक्ष का मजबूती से सामना भी कर सकेगी।
इस नई व्यवस्था से कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है क्योंकि अब पद के लिए संगठनात्मक योगदान और जनता से जुड़ाव मुख्य मानदंड होंगे।





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