मुख्यमंत्री साय ने आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं जनभागीदारी से पहुंचाने पर दिया जोर, अफसरों को गांव-गांव जाकर कार्य करने के निर्देश।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों से अपील की है कि वे राज्य के आदिवासी इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को जनभागीदारी के माध्यम से दूर करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि दूरस्थ व पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।
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उन्होंने यह बात आदिवासी क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण की समीक्षा बैठक के दौरान कही, जहां अफसरों को यह निर्देश दिए गए कि जनजातीय बहुल इलाकों में योजनाओं का लाभ सीधा और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचे। साय ने यह भी कहा कि सिर्फ योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, उन्हें जमीनी स्तर पर उतारना और जनसहभागिता के माध्यम से सतत विकास सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री का जोर – जनभागीदारी से ही बनेगा प्रभावी मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय समुदायों को विकास प्रक्रिया में शामिल कर योजनाओं को सफल बनाया जा सकता है। जनजातीय समाज के लोग अपनी भूमि, जल, जंगल से गहराई से जुड़े हैं, इसलिए योजनाएं बनाते समय उनकी भागीदारी और राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे पंचायत स्तर पर चौपाल, ग्रामसभा, और जनसुनवाई जैसे माध्यमों से नियमित संवाद स्थापित करें ताकि स्थानीय समस्याओं की सही पहचान हो सके और त्वरित समाधान निकल सके।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष बल
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कई आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है। कई गांवों तक अब भी एंबुलेंस सेवा नहीं पहुंच पाती। इस कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को नई योजनाएं लाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, अधोसंरचना की मजबूती और डिजिटल शिक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा स्कूल चलें हम अभियान को विशेष तौर पर जनजातीय अंचलों में क्रियान्वित किया जा रहा है, ताकि स्कूल ड्रॉपआउट रेट कम हो और अधिक से अधिक बच्चे शिक्षा से जुड़ें।
सड़क और बिजली पहुंचाने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने आदिवासी इलाकों में संपर्क मार्गों की खराब स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए पीडब्ल्यूडी विभाग को निर्देशित किया कि बारिश के मौसम में भी संपर्क बनाए रखने लायक पक्की सड़कें जल्द से जल्द तैयार की जाएं। इसके अलावा, जिन गांवों में अब तक बिजली नहीं पहुंची है, उन्हें मिशन मोड में विद्युतीकरण से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि आदिवासी समाज हमारे राज्य की आत्मा है। उनका विकास राज्य के समग्र विकास से जुड़ा है।”
कृषि और आजीविका को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री साय ने वन उत्पादों, लघु वनोपज, और पारंपरिक कृषि पर आधारित स्थानीय व्यवसायों को बढ़ावा देने की बात भी कही। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आदिवासी किसानों के लिए प्रशिक्षण शिविर, बीज वितरण, सिंचाई योजनाएं और मार्केट लिंकेज को प्राथमिकता दी जाए।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने आदिवासी महिलाओं के स्व-सहायता समूहों की सराहना करते हुए उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अधिक ऋण सहायता और विपणन सहायता का निर्देश दिया।
नक्शे में छूटे गांवों को जोड़ने का आदेश
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि कुछ आदिवासी गांव आज भी सरकारी योजनाओं की पहुंच से बाहर हैं क्योंकि वे सर्वे में शामिल नहीं हो पाए। मुख्यमंत्री ने इस पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि नए सर्वेक्षण के माध्यम से इन गांवों को सूचीबद्ध कर योजनाओं से जोड़ा जाए।
मुख्यमंत्री की अपील
मुख्यमंत्री साय ने कहा, “हमारे अफसरों को कार्यालयों से बाहर निकलकर गाँवों में जाना होगा, लोगों की बात सुननी होगी और समस्याओं को समझकर समाधान देने होंगे। जनभागीदारी से ही हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई भी नागरिक सुविधाओं से वंचित न रह जाए।”
