मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय दो दिन के दिल्ली दौरे पर, हाईकमान से मुलाकात तय, छत्तीसगढ़ में संभावित कैबिनेट विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सोमवार से दो दिन के दौरे पर दिल्ली में रहेंगे। इस दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, खासकर तब जब राज्य में कैबिनेट विस्तार की चर्चा जोरों पर है। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर कैबिनेट विस्तार को अंतिम रूप दे सकते हैं।
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, साय की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महासचिव बीएल संतोष से मुलाकात तय मानी जा रही है। इस दौरान मंत्रीमंडल के संभावित चेहरों पर चर्चा होगी और संगठन की प्राथमिकताएं स्पष्ट की जाएंगी।
क्या है दौरे की असल वजह?
हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दौरे को “सरकारी और संगठनात्मक चर्चाओं” के रूप में बताया गया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे कैबिनेट विस्तार की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2023 में बीजेपी सरकार के गठन के बाद से अब तक सीमित सदस्यों वाला कैबिनेट काम कर रहा है। कई जिलों और वर्गों को अब तक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है, जिससे असंतोष पनप रहा है।
किन नए चेहरों को मिल सकता है मौका
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आगामी कैबिनेट विस्तार में 5 से 6 नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। इनमें ओबीसी, आदिवासी और महिला वर्ग से आने वाले विधायकों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
संभावित नामों में शामिल हैं:
- अजय चंद्राकर (पूर्व मंत्री)
- ब्रजमोहन अग्रवाल (वरिष्ठ नेता)
- लता उसेंडी (महिला चेहरा)
- अर्पिता सिंह (नवोदित विधायक)
- और एक-दो आदिवासी बहुल क्षेत्रों से प्रतिनिधि
संगठन संतुलन बनाना मुख्य उद्देश्य
साय सरकार संगठन और क्षेत्रीय संतुलन बनाने के दबाव में है। छत्तीसगढ़ जैसे विविध सामाजिक-राजनीतिक राज्य में सभी वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व देना चुनौतीपूर्ण है। यही कारण है कि कैबिनेट विस्तार को लेकर दिल्ली में गहन विचार-विमर्श जरूरी माना जा रहा है।
इसके अलावा संगठन की अंदरूनी गुटबाजी और वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को भी संतुलित करने का प्रयास इस दौरे में झलक सकता है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे पर कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी को 8 महीने बाद भी अपनी सरकार पूरी तरह से गठित करने का आत्मविश्वास नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा,
“छत्तीसगढ़ की जनता को ठगा गया है। आज भी प्रदेश में कई विभागों के पास स्थायी मंत्री नहीं हैं। अफसरशाही हावी है और जनहित प्रभावित हो रहा है।”
प्रशासनिक दृष्टिकोण से क्यों है ज़रूरी?
राज्य में कई अहम विभागों जैसे—गृह, स्वास्थ्य, राजस्व, नगरीय प्रशासन—अभी भी सीमित मंत्रियों के पास हैं, जिससे फैसलों में देरी हो रही है। बजट पारित होने के बाद योजनाओं के क्रियान्वयन में गति लाने के लिए स्थायी मंत्रीमंडल का गठन अब जरूरी माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी इस ओर संकेत दिया है कि छत्तीसगढ़ सरकार को जल्द पूर्ण आकार देना जरूरी है।
क्या है साय सरकार की रणनीति?
मुख्यमंत्री साय शांत और रणनीतिक तरीके से कार्य कर रहे हैं। उनकी प्राथमिकता है कि सभी फैसले पार्टी संगठन की सहमति से हों, ताकि भविष्य में कोई असंतुलन या विवाद खड़ा न हो।
यह भी माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ कुछ निगम-मंडलों में भी नियुक्तियों की घोषणा जल्द की जाएगी, जिससे असंतुष्ट विधायकों को साधा जा सके।
अगले कदम क्या होंगे?
- दिल्ली दौरे के बाद मुख्यमंत्री रायपुर लौटकर राज्यपाल से मुलाकात कर सकते हैं।
- इसके बाद राजभवन में शपथग्रहण समारोह की तिथि तय की जाएगी।
- राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगस्त के पहले सप्ताह में कैबिनेट विस्तार की संभावना है।
निष्कर्ष नहीं, पर संकेत स्पष्ट
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह दिल्ली दौरा महज एक शिष्टाचार यात्रा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति के अगले चरण की बुनियाद रखता नजर आ रहा है। अगर इस दौरे में हाईकमान से हरी झंडी मिल जाती है, तो राज्य को जल्द एक पूर्ण और संतुलित मंत्रीमंडल मिलने की उम्मीद बन सकती है।
