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रायपुर: जन्म से अंधी बच्ची अब देख पाएगी

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 14 August 2025

रायपुर में जन्म से दृष्टिहीन 6 वर्षीय बच्ची की सफल कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सर्जरी, अब वह दुनिया देख पाएगी, माता-पिता और डॉक्टर खुशी से अभिभूत।

रायपुर: जन्म से दृष्टिहीन 6 वर्षीय बालिका आखिरकार दुनिया को देख पाएगी। रायपुर के एक निजी अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने सफल कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सर्जरी की, जिससे बच्ची की आँखों की रोशनी वापस आने की उम्मीद जगी है।

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बालिका की कहानी

छह वर्षीय बच्ची का जन्म ही दृष्टिहीनता के साथ हुआ था। उसके माता-पिता कई वर्षों से दृष्टि उपचार और चिकित्सा विकल्पों की तलाश में थे। विभिन्न अस्पतालों और डॉक्टरों से सलाह लेने के बाद, रायपुर के एक नामी अस्पताल में उसे सर्जरी के लिए भर्ती किया गया।

डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की दृष्टि समस्या कॉर्नियल डिजीज के कारण थी, जिसे समय पर इलाज न मिलने पर स्थायी दृष्टिहीनता हो सकती थी।


सफल सर्जरी और परिणाम

डॉक्टरों की टीम ने लगभग तीन घंटे की कॉर्नियल ट्रांसप्लांट सर्जरी को सफलतापूर्वक संपन्न किया। सर्जरी के बाद बालिका ने पहली बार रोशनी महसूस की, और उसके माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

डॉक्टरों ने कहा:
“यह हमारे लिए भी गर्व का पल है। सही समय पर इलाज और विशेषज्ञों की टीम ने बालिका की दुनिया बदल दी।”


भविष्य की उम्मीदें

बालिका अब धीरे-धीरे दुनिया को देखने और पहचानने की प्रक्रिया शुरू करेगी। सर्जरी के बाद उसे नियमित दृष्टि जांच और फॉलो-अप की जरूरत होगी। डॉक्टरों का कहना है कि यदि फॉलो-अप ठीक तरह से किया गया तो बालिका भविष्य में पूरी तरह सामान्य दृष्टि प्राप्त कर सकती है।

बालिका के माता-पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“हमारी बेटी अब सामान्य जीवन जी सकेगी। डॉक्टरों और अस्पताल के पूरे स्टाफ को हम दिल से धन्यवाद देते हैं।”


विशेषज्ञों की राय

आंखों के विशेषज्ञों ने कहा कि कॉर्नियल ट्रांसप्लांट जन्म से दृष्टिहीन बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से न केवल दृष्टि लौटाई जा सकती है, बल्कि बच्ची का शैक्षिक और सामाजिक विकास भी संभव हो जाता है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि छोटे बच्चों में यह सर्जरी ज्यादा सफल होती है, क्योंकि उनके शरीर में सर्जरी के प्रति प्रतिक्रिया तेज और बेहतर होती है।


निष्कर्ष

रायपुर में जन्म से दृष्टिहीन 6 वर्षीय बालिका की आंखों की रोशनी लौटने की कहानी उम्मीद और प्रेरणा देती है। यह घटना दिखाती है कि सही इलाज, विशेषज्ञ डॉक्टरों और समय पर कार्रवाई से किसी की जिंदगी में बड़ा बदलाव संभव है।


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