दंतेवाड़ा में 63 नक्सलियों ने बिना हथियार आत्मसमर्पण किया, पश्चिम बस्तर डिवीजन को बड़ा झटका, सरकार की सरेंडर नीति का दिखा असर।
दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षा बलों और प्रशासन को बड़ी सफलता मिली है। पश्चिम बस्तर डिवीजन को उस वक्त करारा झटका लगा, जब एक साथ 63 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। खास बात यह रही कि समर्पण करने वाले नक्सली बिना हथियार के सामने आए। उनका कहना था कि वे पहले ही अन्य गुटों और हालिया घटनाओं में अपने हथियार गंवा चुके हैं।
समर्पण से नक्सल संगठन में हलचल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली पश्चिम बस्तर डिवीजन के विभिन्न एरिया कमेटियों से जुड़े हुए थे। इनमें पुरुषों के साथ कुछ महिला कैडर भी शामिल हैं। यह सामूहिक समर्पण नक्सली संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे इलाके में उनकी सक्रिय ताकत कमजोर होगी।
हथियार न होने की वजह बताई
समर्पण करने वाले नक्सलियों ने बताया कि जंगलों में लगातार दबाव, आपसी संघर्ष और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते वे हथियार नहीं बचा पाए। कुछ ने दावा किया कि हथियार पहले ही लूट लिए गए थे, जबकि कुछ हथियार छिपाने के दौरान नष्ट हो गए। प्रशासन ने इन दावों की जांच शुरू कर दी है।
सरेंडर नीति का असर
अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार की नई आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। बेहतर पुनर्वास, सुरक्षा की गारंटी, आर्थिक सहायता और मुख्यधारा से जुड़ने के अवसर मिलने से नक्सली हिंसा छोड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।
पुलिस-प्रशासन का बयान
वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि समर्पण करने वाले सभी नक्सलियों का सत्यापन किया जा रहा है। जांच के बाद उन्हें सरकारी सरेंडर नीति के तहत लाभ दिए जाएंगे। अधिकारियों ने इसे क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में अहम कदम बताया।
स्थानीय स्तर पर सकारात्मक संदेश
इस घटना से स्थानीय ग्रामीणों में भी उम्मीद जगी है। जानकारों का मानना है कि बड़े पैमाने पर हुआ यह समर्पण बाकी सक्रिय नक्सलियों के लिए भी संदेश है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाया जा सकता है।
आगे की रणनीति
प्रशासन अब आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास, कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है, ताकि वे दोबारा हिंसा की राह पर न लौटें।


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