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PM आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 19 December 2025

रायपुर में PM आवास योजना में फर्जीवाड़ा उजागर, जमीन किसी और की और मकान किसी अन्य के नाम स्वीकृत, जांच में खुली बड़ी गड़बड़ी।

रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रायपुर जिले में हुई जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि कई मामलों में जिस जमीन पर आवास स्वीकृत किया detach किया गया, वह किसी और के नाम दर्ज है, जबकि मकान किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर स्वीकृत कर दिया गया। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद जब आवास योजना के दस्तावेजों की गहन जांच की गई, तो कई विसंगतियां सामने आईं। रिकॉर्ड में जमीन के मालिक और लाभार्थी के नाम अलग-अलग पाए गए। कुछ मामलों में तो जमीन के असली मालिक को इसकी जानकारी तक नहीं थी कि उनकी जमीन पर किसी और के नाम से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान स्वीकृत कर दिया गया है।

कैसे खुली पोल

बताया जा रहा है कि ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने जांच टीम गठित की थी। टीम ने जब भौतिक सत्यापन किया, तो दस्तावेजों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर मिला। ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज विवरण और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान करने पर फर्जीवाड़ा साफ नजर आया। कई लाभार्थियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने केवल कागजों के आधार पर आवास स्वीकृति प्राप्त की थी।

अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में पंचायत स्तर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि सत्यापन प्रक्रिया में भारी लापरवाही बरती गई। बिना मौके पर जांच किए ही आवास स्वीकृत कर दिए गए, जिससे फर्जी लाभार्थियों को फायदा पहुंचा।

प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। जिन मामलों में फर्जीवाड़ा साबित होगा, वहां न सिर्फ आवास की स्वीकृति निरस्त की जाएगी, बल्कि संबंधित अधिकारियों और लाभार्थियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के लिए है और इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

भविष्य में कड़े नियम

इस घटना के बाद प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि आगे से जमीन और लाभार्थी के सत्यापन की प्रक्रिया और सख्त की जाएगी। राजस्व रिकॉर्ड, आधार और भौतिक सत्यापन को अनिवार्य किया जाएगा, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े दोबारा न हो सकें।

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