भारतमाला घोटाले में एक और जांच टीम ने रिपोर्ट सौंपी। दो टीमों की रिपोर्ट अभी बाकी, आरोपों ने परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।
नई दिल्ली। देश की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की गूंज अब तेज हो चुकी है। इस मामले में गठित जांच समितियों में से एक और टीम ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। हालांकि अभी दो जांच टीमों की रिपोर्ट आना बाकी है।
क्या है भारतमाला परियोजना?
भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार की वह महत्वाकांक्षी योजना है जिसके तहत देशभर में 35,000 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण और चौड़ीकरण किया जाना है। इस परियोजना को भारत के आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स लागत घटाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना गया था। लेकिन अब इसके क्रियान्वयन में बड़े स्तर पर अनियमितताओं और घोटाले के आरोप सामने आए हैं।
घोटाले के आरोप
सूत्रों के अनुसार, परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण, टेंडर प्रक्रिया और लागत अनुमान में गड़बड़ियों के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि परियोजना की लागत जानबूझकर बढ़ाई गई और ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। विपक्षी दलों ने इस मामले को संसद और मीडिया में उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
जांच टीमों का गठन
केंद्र सरकार ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए तीन स्वतंत्र जांच समितियों का गठन किया था। इनमें से पहली टीम पहले ही अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है, जिसमें कई गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया। अब दूसरी टीम ने भी अपनी रिपोर्ट सौंपी है। इससे मामले की गंभीरता और भी बढ़ गई है। हालांकि अभी दो टीमों की अंतिम रिपोर्ट आना बाकी है।
दूसरी रिपोर्ट में क्या कहा गया?
अभी तक रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। लेकिन सूत्रों के हवाले से खबर है कि दूसरी टीम ने भी लागत बढ़ोतरी, अनुचित भुगतान और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए हैं।
सरकार का रुख
सरकार ने कहा है कि जांच पूरी होने तक किसी भी नतीजे पर पहुँचना जल्दबाजी होगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सभी रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
विपक्ष का हमला
विपक्षी दलों ने इसे अब तक का बड़ा “हाईवे स्कैम” करार दिया है। उनका कहना है कि जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग हुआ है। कांग्रेस, आप और अन्य दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि भारतमाला परियोजना को विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया।
जनता की चिंता
आम जनता की चिंता इस बात को लेकर है कि भारतमाला जैसी परियोजनाएं विकास के लिए जरूरी हैं, लेकिन अगर इनमें ही भ्रष्टाचार होगा तो इसका असर देश की प्रगति और करदाताओं की जेब पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों की राय
सड़क निर्माण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाओं में पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन सबसे जरूरी है। अगर जांच रिपोर्ट में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह देश की अवसंरचना योजनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा।
आगे की कार्रवाई
अभी सरकार दो अन्य जांच टीमों की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। संभावना है कि सभी रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
निष्कर्ष
भारतमाला परियोजना का उद्देश्य देश को विकास की नई राह पर ले जाना था, लेकिन घोटाले के आरोपों ने इसकी साख पर दाग लगा दिया है। अब जनता की नजर इस पर है कि जांच पूरी होने के बाद सरकार क्या कदम उठाती है।
