बस्तर के आदिवासी किसन मंडावी ने तीर-धनुष से आईटी तक का सफर तय कर नई उम्मीद जगाई, युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत।
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर से निकलकर आईटी सेक्टर में अपनी पहचान बनाने वाले किसन मंडावी आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा और नई उम्मीद की किरण बन चुके हैं। कभी जंगलों में तीर-धनुष चलाकर पारंपरिक जीवन जीने वाले मंडावी ने कड़ी मेहनत और शिक्षा की बदौलत आईटी उद्योग में बड़ा मुकाम हासिल किया है।
आदिवासी पृष्ठभूमि से आईटी तक
किसन मंडावी का जन्म बस्तर के एक आदिवासी परिवार में हुआ। बचपन से ही तीर-धनुष चलाना, जंगल की पगडंडियों पर घूमना और पारंपरिक जीवन शैली उनका हिस्सा रहा। लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी लगन ने उनका रास्ता बदल दिया। स्थानीय स्कूल से पढ़ाई के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए रायपुर और फिर दिल्ली का रुख किया। वहीं से उन्होंने कंप्यूटर साइंस में डिग्री लेकर आईटी सेक्टर में कदम रखा।
चुनौतियों से भरी राह
मंडावी के लिए यह सफर आसान नहीं था। आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और ग्रामीण परिवेश से निकलकर महानगर में अपनी जगह बनाना बड़ी चुनौती थी। कई बार उन्हें पढ़ाई छोड़ने तक की नौबत आई, लेकिन परिवार और शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने हार नहीं मानी।
आईटी सेक्टर में योगदान
किसन मंडावी ने देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में काम करते हुए न सिर्फ अपने लिए बल्कि अपने समुदाय के लिए भी पहचान बनाई। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में अहम प्रोजेक्ट्स पर काम किया। उनकी उपलब्धियों ने यह साबित कर दिया कि बस्तर जैसे दूरदराज़ इलाके से भी कोई विश्वस्तरीय तकनीकी विशेषज्ञ बन सकता है।
समाज सेवा में सक्रिय
आईटी सेक्टर में सफलता पाने के बाद मंडावी ने अपने इलाके को नहीं भुलाया। वे समय-समय पर बस्तर लौटकर शिक्षा और तकनीक को बढ़ावा देने की कोशिश करते हैं। उन्होंने ग्रामीण युवाओं के लिए डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम शुरू किए और कई स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित करने में मदद की।
स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा
किसन मंडावी की कहानी बस्तर और आस-पास के युवाओं के लिए प्रेरणा है। जहां पहले युवाओं के लिए अवसर सीमित दिखाई देते थे, वहीं अब मंडावी जैसे रोल मॉडल ने दिखाया है कि कड़ी मेहनत से सब कुछ संभव है।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षाविदों का मानना है कि मंडावी जैसे लोगों की कहानियां समाज में सकारात्मक बदलाव लाती हैं। यदि सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर ऐसे युवाओं का समर्थन करें तो बस्तर जैसे इलाके से और भी टैलेंट सामने आ सकता है।
डिजिटल इंडिया से जुड़ाव
किसन मंडावी की सफलता को प्रधानमंत्री मोदी के डिजिटल इंडिया मिशन से भी जोड़ा जा रहा है। ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को तकनीकी शिक्षा से जोड़ना अब एक राष्ट्रीय लक्ष्य है, और मंडावी इसका जीवंत उदाहरण हैं।
भविष्य की योजना
मंडावी का सपना है कि बस्तर में एक टेक्नोलॉजी सेंटर स्थापित करें, जहां स्थानीय युवा आईटी की ट्रेनिंग लेकर सीधे नौकरी पा सकें। उनका मानना है कि अगर शिक्षा और तकनीक गांवों तक पहुंचाई जाए तो बस्तर जैसे इलाकों का भविष्य बदल सकता है।
निष्कर्ष
किसन मंडावी की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे बस्तर की आशा है। तीर-धनुष से आईटी तक का उनका सफर बताता है कि शिक्षा और दृढ़ संकल्प से हर बाधा पार की जा सकती है। वे आज बस्तर के युवाओं के लिए प्रेरणा और देश के लिए गर्व का विषय हैं।


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