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बस्तर की प्लास्टिक सड़क पहली बारिश में टूटी

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 4 August 2025

बस्तर की प्लास्टिक सड़क पहली बारिश में टूटी, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा; घटिया निर्माण, भ्रष्टाचार और प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल।

जगदलपुर।छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में बनी राज्य की पहली प्लास्टिक मिश्रित सड़क अब सवालों के घेरे में है। पर्यावरण हितैषी और टिकाऊ बताकर प्रचारित की गई यह सड़क पहली ही बारिश में उखड़ गई। इससे न केवल सड़क पर आवागमन ठप हो गया, बल्कि गांव वालों का गुस्सा भी भड़क गया।

स्थानीय लोगों ने घटिया निर्माण और सरकारी लापरवाही को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और जांच की मांग की है। अब यह परियोजना पर्यावरण नवाचार के बजाय भ्रष्टाचार की मिसाल बनकर सामने आ रही है।

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क्या है प्लास्टिक सड़क योजना?

बस्तर जिले में यह सड़क 2023 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बनाई गई थी। इसका उद्देश्य था:

  • सड़क निर्माण में बर्बाद प्लास्टिक का पुनः उपयोग
  • लंबे समय तक टिकाऊ और रखरखाव-मुक्त सड़क बनाना
  • पर्यावरणीय अपशिष्ट को उपयोग में लाना

स्थानीय प्रशासन और पीडब्ल्यूडी ने दावा किया था कि इस तकनीक से बनी सड़क कम खर्चीली, अधिक मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल होगी।

पहली बारिश में ही हुआ सच उजागर

लेकिन जून 2025 की पहली ही तेज बारिश में इस सड़क की परतें उखड़ गईं, गड्ढे बन गए और कई हिस्सों पर कीचड़ जम गया।

  • जहां पहले वाहनों का सामान्य आवागमन था, अब वहां पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
  • ग्रामीणों ने बताया कि सड़क सिर्फ ऊपर से प्लास्टिक की परत डालकर तुरंत उद्घाटन के लिए तैयार की गई थी, जबकि अंदर का बेस घटिया था।

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

दरणा, फरसगांव, बेंगलूर, और काकलूर गांवों के लोग इस सड़क का उपयोग करते हैं।

  • अब उन्होंने तहसील कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर अफसरों के खिलाफ नारेबाजी की।
  • ग्रामीणों का कहना है:

घटिया निर्माण की आशंका

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि:

  • निर्माण में स्थानीय ठेकेदारों द्वारा गुणवत्ता से समझौता किया गया
  • प्लास्टिक की मात्रा को घोषणा से अधिक दिखाकर बिल पास कराया गया
  • मिट्टी और गिट्टी का बेस सही तरीके से नहीं बनाया गया

जनप्रतिनिधियों ने मांगी जांच

पूर्व सरपंच और जनपद सदस्य ने इस मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों पर FIR होनी चाहिए।
उन्होंने लोकायुक्त को भी शिकायत देने की बात कही है।

क्या बोले अधिकारी?

पीडब्ल्यूडी के एसडीओ का कहना है:

लेकिन ग्रामीणों का सवाल है कि पहली बारिश में ही सड़क कैसे उखड़ गई? क्या यह प्लास्टिक तकनीक विफल है या निर्माण में ही गड़बड़ी हुई?

प्लास्टिक सड़क की तकनीक पर भी सवाल

यह पहली बार नहीं है जब प्लास्टिक सड़कें असफल हुई हों। कई राज्यों में ऐसी परियोजनाओं को लेकर सवाल उठे हैं।

  • प्लास्टिक और बिटुमिन का सही अनुपात न होने पर यह तकनीक लंबे समय तक टिक नहीं पाती
  • यहां भी यही संदेह जताया जा रहा है कि ठेकेदारों ने मात्रा और प्रक्रिया में लापरवाही की है

राज्य सरकार की चुप्पी

इस पूरे मुद्दे पर अभी तक राज्य स्तर से कोई ठोस बयान नहीं आया है।

  • विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता नहीं है
  • अब ग्रामीण इलाकों की जनता खुद सड़कों की जांच और जवाब मांग रही है

जनता ने की स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों ने कहा कि एक बार प्लास्टिक सड़क बनाने के बजाय स्थायी और गुणवत्ता युक्त कंक्रीट सड़क बनाई जाए।

  • साथ ही पंचायत प्रतिनिधियों को योजना की निगरानी में शामिल करने की मांग भी की गई है।
  • ताकि भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण पर रोक लगे।

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