छत्तीसगढ़ के बस्तर में बाढ़ की स्थिति गंभीर, गोवा और मध्यप्रदेश ने भेजी मदद, राहत कार्य जारी, प्रशासन और एनडीआरएफ सक्रिय।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में लगातार भारी बारिश के चलते बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। नदी-नाले उफान पर हैं और कई क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बस्तर के जिलों जैसे जगदलपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा और कोंडागांव में ग्रामीण इलाके जलमग्न हैं, और कई गांवों के संपर्क टूट चुके हैं।
प्रशासन ने राहत कार्यों को प्राथमिकता दी है। राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन की टीमों को प्रभावित इलाकों में भेजा है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें फंसे हुए लोगों को निकालने और सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने में जुटी हैं। प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं।
इस मुश्किल समय में अन्य राज्यों से भी मदद मिल रही है। मध्यप्रदेश सरकार ने पहले ही राहत सामग्री भेजी थी और अब गोवा सरकार ने भी बस्तर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। गोवा से राशन, बिस्कुट, पानी की बोतलें और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री भेजी जा रही है। राज्य सरकार ने स्थानीय प्रशासन से कहा है कि राहत सामग्री तुरंत प्रभावित लोगों तक पहुँचाई जाए।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करेगी। उन्होंने प्रशासन और राहत एजेंसियों को निर्देश दिए कि प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जाए और उन्हें भोजन, पानी और मेडिकल सहायता प्रदान की जाए।
अधिकारियों के अनुसार, भारी बारिश के कारण बस्तर के कई मार्ग बंद हैं। कुछ इलाकों में बिजली और टेलीफोन की सुविधा भी बाधित हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में राहत कार्यों में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें सक्रिय हैं।
बस्तर में इस बाढ़ की वजह से किसानों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आंकलन किया जा रहा है और प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जलस्तर इतना बढ़ गया है कि कई घर और दुकाने पानी में डूब गए हैं। लोग अपने परिवार और संपत्ति की सुरक्षा के लिए ऊंचे स्थानों पर शरण ले रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।
राज्य सरकार ने सभी जिलों में आपदा नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिए हैं। बस्तर के जिला प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।
