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ऑटोनॉमस कॉलेजों की सीटें फुल, सरकारी में खाली

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 1 August 2025

ओपन काउंसलिंग में ऑटोनॉमस कॉलेजों की अधिकतर सीटें भर चुकी हैं, जबकि सरकारी कॉलेजों में अब भी अधिकांश सीटें खाली हैं। दाखिला अब सीधे होगा।

रायपुर। राज्य के कॉलेजों में स्नातक स्तर पर प्रवेश के लिए चल रही ओपन काउंसलिंग प्रक्रिया में इस वर्ष छात्रों की प्राथमिकता स्पष्ट रूप से ऑटोनॉमस कॉलेजों की ओर झुकी दिखाई दे रही है। छत्तीसगढ़ के अधिकांश स्वशासी (ऑटोनॉमस) कॉलेजों की सीटें लगभग पूरी भर चुकी हैं, वहीं सरकारी कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें अब भी खाली हैं।

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ऑनलाइन काउंसलिंग के पहले और दूसरे चरण के बाद जो छात्र अब भी सीट अलॉटमेंट से वंचित रह गए थे, उनके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने ओपन काउंसलिंग की शुरुआत की थी। इस काउंसलिंग में छात्रों को बिना किसी मेरिट सूची के सीधे कॉलेज जाकर प्रवेश लेने की सुविधा दी गई है।

ऑटोनॉमस कॉलेजों को पहली पसंद

राजधानी रायपुर समेत बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, और अंबिकापुर के प्रमुख स्वशासी कॉलेजों में छात्रों का रुझान देखने को मिला। विज्ञान, वाणिज्य और मानविकी संकायों की अधिकांश सीटें ऑटोनॉमस कॉलेजों में पहले ही दिन भर गईं। इनमें सरकारी नागार्जुन स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर, साइंस कॉलेज, शासकीय ई.आर. राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर आदि प्रमुख रहे।

सरकारी कॉलेजों में खाली सीटें चिंता का विषय

जहां एक ओर ऑटोनॉमस संस्थान छात्रों से भरते जा रहे हैं, वहीं कई जिलों के सामान्य सरकारी कॉलेजों में बीए, बीकॉम और बीएससी की सैकड़ों सीटें खाली पड़ी हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इन कॉलेजों में अधोसंरचना, फैकल्टी की कमी और कम प्लेसमेंट अवसरों के कारण छात्र अब इन्हें कम प्राथमिकता दे रहे हैं।

अब ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की नीति से होगा दाखिला

उच्च शिक्षा विभाग ने बताया है कि अब शेष बची सीटों पर दाखिला पहले आओ-पहले पाओ की तर्ज पर किया जाएगा। छात्रों को अपने मूल प्रमाण पत्रों और फीस के साथ सीधे कॉलेज जाकर दाखिला लेना होगा। सीटें सीमित होने के कारण छात्रों को सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करें।

डिग्री के साथ कौशल भी प्राथमिकता

इस वर्ष छात्रों की पसंद में बड़ा बदलाव देखा गया है। पारंपरिक विषयों के मुकाबले व्यावसायिक और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में अधिक मांग रही। बीसीए, बीबीए, बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी जैसे पाठ्यक्रमों की सीटें कई कॉलेजों में पहले ही दिन भर गईं।

कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया

छात्रों की इस प्राथमिकता पर कॉलेज प्रशासन ने भी प्रतिक्रिया दी है। नागार्जुन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अशोक शर्मा ने बताया, “हमारा फोकस छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी कौशल देना है। इसी वजह से छात्र हमारे कॉलेज को प्राथमिकता दे रहे हैं।”

छात्रों का अनुभव

बीएससी की छात्रा साक्षी यादव बताती हैं, “ऑटोनॉमस कॉलेज में सुविधाएं, लैब, फैकल्टी और प्लेसमेंट बेहतर हैं। इसलिए हमने पहले काउंसलिंग के बाद भी इंतज़ार किया और अब जाकर दाखिला लिया।” वहीं बीए में प्रवेश लेने वाले राकेश साहू का कहना है, “सरकारी कॉलेज में सीटें बची थीं, लेकिन अब समय बर्बाद किए बिना सीधे दाखिला लिया है।”

अधिकारियों की अपील

उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक ने बताया कि यह स्थिति दर्शाती है कि छात्रों की प्राथमिकता अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की ओर है। उन्होंने छात्रों से अपील की है कि जो छात्र अब तक दाखिला नहीं ले पाए हैं वे जल्द कॉलेजों में जाकर प्रवेश सुनिश्चित करें।

भविष्य के लिए योजना

राज्य सरकार अब सरकारी कॉलेजों की गुणवत्ता बढ़ाने और उन्हें स्वशासी दर्जा देने की दिशा में काम कर रही है। अगले शैक्षणिक सत्र तक कई कॉलेजों में नई सुविधाएं, प्रशिक्षित फैकल्टी और डिजिटल कक्षाओं की व्यवस्था की जाएगी ताकि छात्र सरकारी कॉलेजों की ओर भी आकर्षित हों।


निष्कर्ष

इस वर्ष की काउंसलिंग प्रक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब छात्र सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि गुणवत्ता और भविष्य की संभावनाओं के आधार पर कॉलेज चुनते हैं। ऑटोनॉमस कॉलेजों की लोकप्रियता बढ़ी है, वहीं सरकारी कॉलेजों को अपनी साख बहाल करने के लिए नए प्रयास करने होंगे।

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