अमेरिका ने अदालत में टैरिफ नीति का बचाव किया, कहा- भारत पर टैरिफ यूक्रेन में शांति और अमेरिकी आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी।
अमेरिका की पूर्व प्रशासन टीम, ट्रम्प टीम, ने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय अदालत में अपनी टैरिफ नीति के बचाव में दलील पेश की। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका पर टैरिफ लागू नहीं किया जाता तो देश गरीब हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत पर लगाए गए टैरिफ यूक्रेन में शांति स्थापित करने के लिए आवश्यक हैं।
टीम ने अदालत में तर्क दिया कि अमेरिकी उद्योग और किसानों की सुरक्षा के लिए टैरिफ महत्वपूर्ण है। इसके बिना अमेरिकी बाजार कमजोर हो जाएगा और वैश्विक आर्थिक संतुलन प्रभावित होगा। टीम ने जोर देकर कहा कि भारत पर टैरिफ लगाने का उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीतिक स्थिरता और यूक्रेन संकट में मदद करना भी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक नीतियों के बीच संतुलन की जटिलताओं को उजागर करता है। अमेरिकी टीम के अनुसार, टैरिफ नीति का पालन वैश्विक व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से जरूरी है।
भारत ने अदालत में अपनी प्रतिक्रिया दी कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानूनों के अंतर्गत टैरिफ का उद्देश्य एकतरफा दबाव बनाना नहीं होना चाहिए। भारत की ओर से कहा गया कि किसी भी देश पर टैरिफ लगाए जाने से द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अमेरिका ने यह भी दावा किया कि टैरिफ के माध्यम से भारत और अन्य देशों को यूक्रेन में शांति स्थापित करने के प्रयासों में समर्थन देना है। टीम ने अदालत को यह आश्वस्त किया कि टैरिफ केवल राजनीतिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए है और इसका उद्देश्य किसी देश को आर्थिक रूप से नुकसान पहुँचाना नहीं है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और राजनीतिक दबाव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती सामने आई है। अदालत का निर्णय न केवल अमेरिका और भारत के बीच संबंधों पर प्रभाव डालेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और सुरक्षा नीतियों पर भी असर डाल सकता है।
