दुर्ग अस्पताल में कई मरीजों को दवाएं खाने के बाद एलर्जी हुई। स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, संदिग्ध दवाओं की जांच शुरू, सभी मरीज सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
दुर्ग। जिला अस्पताल दुर्ग में इलाज के लिए पहुंचे कई मरीजों को दवा खाने के बाद अचानक एलर्जी की समस्या होने लगी। दवाएं लेने के तुरंत बाद मरीजों के शरीर पर लाल चकत्ते, खुजली और सूजन जैसे लक्षण सामने आए। कुछ मरीजों को सांस लेने में भी परेशानी हुई, जिसके चलते उन्हें तुरंत आपातकालीन कक्ष में भर्ती करना पड़ा। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है और अस्पताल प्रबंधन ने संदिग्ध दवाओं की खेप को तत्काल उपयोग से रोक दिया है।
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अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, बीते दो दिनों में करीब आधा दर्जन मरीजों में ऐसी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इनमें से अधिकांश सामान्य सर्दी-जुकाम और दर्द की दवाएं ले रहे थे। जैसे ही यह मामला सामने आया, अस्पताल प्रशासन ने दवा वितरण केंद्र से संदिग्ध बैच नंबर की दवाओं को वापस मंगा लिया।
डॉक्टरों की टीम जांच में जुटी
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने दवाओं के बैच नंबर की पहचान शुरू कर दी है। डॉक्टरों ने बताया कि यह दवाएं सामान्य रूप से उपयोग की जाती हैं, लेकिन कुछ मामलों में मरीजों के शरीर की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। फिलहाल इन दवाओं को सुरक्षित रखने और नमूने राज्य दवा परीक्षण प्रयोगशाला भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
मरीजों की स्थिति नियंत्रण में
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, जिन मरीजों को एलर्जी की शिकायत हुई थी, उनकी स्थिति अब सामान्य है। उन्हें एंटी-एलर्जिक दवाएं और जरूरी उपचार दिया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि स्थिति गंभीर नहीं है, लेकिन जांच पूरी होने तक सतर्कता बरतना जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की कड़ी निगरानी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने कहा कि दवा आपूर्ति करने वाली कंपनियों से भी जानकारी मांगी जा रही है। यदि परीक्षण में दवाओं की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है, तो संबंधित कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही अन्य जिलों में भी इसी बैच की दवाएं भेजी गई हैं या नहीं, इसकी जांच शुरू कर दी गई है।
आम जनता से अपील
स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी मरीज को दवा खाने के बाद असामान्य लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बिना चिकित्सकीय परामर्श के दवा न लेने की भी सलाह दी गई है।
बड़ा सवाल – गुणवत्ता पर लापरवाही?
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही है। मरीजों का कहना है कि मुफ्त मिलने वाली दवाएं अक्सर उनकी चिंता बढ़ा देती हैं क्योंकि गुणवत्ता की गारंटी नहीं होती। वहीं प्रशासन का कहना है कि सभी दवाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही खरीदी जाती हैं।
निष्कर्ष
दुर्ग अस्पताल की यह घटना स्वास्थ्य विभाग के लिए चेतावनी है कि दवा आपूर्ति की प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण को और मजबूत किया जाए। मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
