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11 साल बाद दिव्यांग को पेंशन मिलने का रास्ता

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 8 August 2025


11 वर्षों तक पेंशन के लिए भटक रहे दिव्यांग को कलेक्टर के निर्देश पर अब अगले माह से पेंशन मिलेगी। प्रशासन की सक्रियता से राहत मिली।



रायपुर। वर्षों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने वाले एक दिव्यांग व्यक्ति की आखिरकार सुनवाई हो गई है। 11 वर्षों से पेंशन की आस में प्रशासनिक गलियारों की दौड़ लगा रहे इस जरूरतमंद को अब अगले माह से पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। जिला कलेक्टर ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि पीड़ित को समय पर लाभ मिल सके।

यह मामला जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव का है, जहां के रहने वाले एक दिव्यांग नागरिक ने लंबे समय से पेंशन योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन किया था। परंतु हर बार फॉर्म की अस्वीकृति, दस्तावेजों की कमी या प्रक्रियात्मक देरी का हवाला देकर उसे वापस लौटा दिया जाता रहा।

दिव्यांग की पीड़ा, प्रशासन की अनदेखी

इस नागरिक ने वर्ष 2013 में सबसे पहले आवेदन किया था। इसके बाद उसने हर वर्ष आवेदन प्रक्रिया दोहराई, मगर किसी न किसी कारणवश उसकी फाइल आगे नहीं बढ़ पाई। प्रशासनिक लापरवाही और फाइलों में दबे उसके आवेदन की सुध लेने वाला कोई नहीं था।

पीड़ित ने कई बार जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज करवाई, मगर कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।

मीडिया की भूमिका बनी बदलाव की वजह

हाल ही में स्थानीय मीडिया ने जब इस मामले को उजागर किया, तो जिला प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर ने खुद इस केस की जांच करवाई और पाया कि आवेदक सभी मापदंडों को पूरा करता है, फिर भी उसे पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

कलेक्टर ने दिए तत्काल निर्देश

कलेक्टर ने संबंधित सामाजिक कल्याण विभाग और जनपद पंचायत के अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़ित की फाइल को तत्काल प्राथमिकता में लिया जाए और आगामी पेंशन सूची में उसका नाम जोड़ा जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अन्य ऐसे प्रकरणों की भी छानबीन की जाए, ताकि कोई और जरूरतमंद लाभ से वंचित न रहे।

आभार व्यक्त करता दिव्यांग व्यक्ति

कलेक्टर के निर्देशों के बाद दिव्यांग व्यक्ति ने राहत की सांस ली। उसने प्रशासन और मीडिया दोनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “अब मुझे उम्मीद है कि अगले महीने से मुझे भी वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन का लाभ मिलेगा। इससे मेरी दवाओं और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो पाएंगी।”

पेंशन नीतियों की समीक्षा की जरूरत

यह मामला पेंशन नीतियों और उनके क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े करता है। यदि एक योग्य लाभार्थी 11 वर्षों तक इंतजार करता रहा और उसे मदद नहीं मिली, तो यह न सिर्फ योजनाओं की विफलता है, बल्कि प्रणालीगत सुधार की भी आवश्यकता को दर्शाता है।

कई बार तकनीकी दिक्कतों, कर्मचारियों की लापरवाही और निगरानी की कमी से हजारों पात्र नागरिक योजना लाभ से वंचित रह जाते हैं। शासन को चाहिए कि वह हर जिले में ऐसे लंबित मामलों की सूची तैयार कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे।

जनता के लिए संदेश

अगर आप या आपका कोई जानने वाला पात्र होते हुए भी पेंशन या अन्य योजनाओं से वंचित है, तो सबसे पहले आवेदन की स्थिति जानें, संबंधित कार्यालय में संपर्क करें और जनसुनवाई या सीएम हेल्पलाइन जैसे प्लेटफॉर्म का प्रयोग करें।

सरकारी योजनाएं हर जरूरतमंद तक पहुंचें, यही इनका उद्देश्य है और नागरिकों को इसके लिए सजग भी रहना चाहिए।

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