मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री से बोधघाट परियोजना की प्रगति और मंजूरी को लेकर नई दिल्ली में महत्वपूर्ण चर्चा की।
रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात कर राज्य की महत्वाकांक्षी बोधघाट बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना को शीघ्र स्वीकृति दिलाने के लिए विस्तृत चर्चा की। यह परियोजना बस्तर अंचल के विकास, जल प्रबंधन और किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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मुख्यमंत्री की इस बैठक को छत्तीसगढ़ सरकार की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत राज्य के पिछड़े क्षेत्रों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा जाना है। बोधघाट परियोजना राज्य के दक्षिणी हिस्से, विशेषकर बस्तर संभाग में कृषि विकास और पेयजल आपूर्ति को सुनिश्चित करेगी।
क्या है बोधघाट परियोजना?
बोधघाट परियोजना इंद्रावती नदी पर आधारित एक बहुउद्देशीय योजना है, जो मुख्यतः बस्तर क्षेत्र में जल भंडारण, सिंचाई, और बिजली उत्पादन के लिए प्रस्तावित है। इस परियोजना के तहत लगभग 3.66 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलनी है। साथ ही, इससे 100 मेगावाट से अधिक जल विद्युत उत्पादन की भी संभावना है।
मुख्यमंत्री का फोकस: बस्तर का समावेशी विकास
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बैठक में बताया कि बस्तर क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होते हुए भी विकास की मुख्यधारा से काफी पीछे रहा है। उन्होंने कहा कि बोधघाट जैसी परियोजनाएं इस क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती हैं। इससे न केवल सिंचाई और कृषि को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार और उद्योग के नए अवसर भी खुलेंगे।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से इस योजना को शीघ्र स्वीकृति देने और केंद्रीय अनुदान प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने परियोजना की रूपरेखा को पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन के अनुसार तैयार किया है, जिससे विस्थापन और पर्यावरणीय क्षति को न्यूनतम किया जा सके।
केंद्रीय मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन
जलशक्ति मंत्री श्री पाटिल ने मुख्यमंत्री की बातों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के जल प्रबंधन और कृषि विकास की योजनाओं को प्राथमिकता देती है। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि वे परियोजना प्रस्ताव की गहन समीक्षा करें और आवश्यक प्रक्रियाएं तेज़ करें। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश के हर कोने में जल आधारित विकास की दिशा में समर्पित है।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
- स्थान: इंद्रावती नदी, बस्तर संभाग
- प्रस्तावित लाभ: 3.66 लाख हेक्टेयर सिंचाई
- जल विद्युत उत्पादन: अनुमानित 100 मेगावाट
- लाभार्थी ज़िले: बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर
- लागत: अनुमानित 22,000 करोड़ रुपये
- पर्यावरणीय असर: न्यूनतम विस्थापन की योजना, पारंपरिक ग्राम संरचनाओं का संरक्षण
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी भूमिका अहम
बस्तर क्षेत्र के सांसद और विधायकों ने भी इस परियोजना को लेकर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की आवश्यकता जताई है। वे लगातार इस योजना की पैरवी करते आ रहे हैं। जनजातीय समुदायों की भागीदारी और हितों की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय नेतृत्व भी संवाद की प्रक्रिया में शामिल है।
पर्यावरणीय और सामाजिक समीक्षा
बोधघाट परियोजना को लेकर पहले भी पर्यावरणीय चिंताएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन नवीनतम प्रस्ताव में सभी आवश्यक एहतियातों को शामिल किया गया है। राज्य सरकार का दावा है कि यह परियोजना ‘ग्रीन प्रोजेक्ट मॉडल’ के तहत विकसित की जाएगी, जिससे जंगल, जैव विविधता और स्थानीय समुदायों को नुकसान न हो।
बस्तर के भविष्य के लिए निर्णायक पहल
मुख्यमंत्री साय की यह पहल बस्तर के विकास को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। बोधघाट परियोजना की स्वीकृति और त्वरित कार्यान्वयन से न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने में भी मदद मिलेगी। इस परियोजना को राजनीतिक से ज्यादा सामाजिक और आर्थिक सुधार का माध्यम माना जा रहा है।
निष्कर्ष
बोधघाट परियोजना पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री की यह बैठक छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना की स्वीकृति से लाखों किसानों को फायदा पहुंचेगा, जल संरक्षण होगा, और क्षेत्रीय समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
