छत्तीसगढ़ में कलेक्टर ने लंबे समय से गैरहाजिर संविदा कर्मचारियों को सेवा से हटाया, प्रशासनिक अनुशासन को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम।
रायपुर । छत्तीसगढ़ में सरकारी अनुशासन को सख्ती से लागू करते हुए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। लंबे समय से बिना सूचना के अनुपस्थित संविदा कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह निर्णय शासन के दिशानिर्देशों और प्रशासनिक अनुशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लिया गया है।
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कलेक्टर कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, विभिन्न विभागों में कार्यरत कई संविदा कर्मचारी बिना किसी वैध कारण या सूचना के महीनों से गैरहाजिर चल रहे थे। इन कर्मचारियों को कई बार कारण बताओ नोटिस भेजा गया, परंतु संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने और ड्यूटी पर पुनः उपस्थित न होने के चलते उनके खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की गई।
⚖️ प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन की वापसी
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सरकारी सेवा में रहते हुए अनुशासन और उत्तरदायित्व सर्वोपरि हैं। कोई भी कर्मचारी यदि निर्धारित कर्तव्यों का पालन नहीं करता है और लगातार अनुपस्थित रहता है, तो उसे सेवा में बने रहने का अधिकार नहीं है।
यह कार्रवाई न केवल अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ एक सख्त संदेश है, बल्कि यह प्रशासनिक प्रणाली को मजबूत और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
📝 संविदा सेवा में भी जवाबदेही जरूरी
संविदा कर्मचारियों को शासकीय सेवाओं की प्रक्रिया और अनुशासन का पालन करना अनिवार्य होता है। हालांकि उनका कार्यकाल स्थायी कर्मचारियों की तुलना में अस्थायी होता है, फिर भी वे शासन के प्रति जवाबदेह होते हैं। यह निर्णय इस बात की पुष्टि करता है कि सरकार संविदा सेवा को भी गंभीरता से ले रही है।
🛑 नोटिस के बाद भी नहीं लौटे कर्मचारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन कर्मचारियों को पहले विभागीय स्तर पर चेतावनी दी गई थी। इसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। परंतु इन कर्मचारियों द्वारा न तो संतोषजनक जवाब दिया गया और न ही वे पुनः कार्यस्थल पर उपस्थित हुए। परिणामस्वरूप सेवा समाप्ति का निर्णय लिया गया।
📈 नई नियुक्तियों का रास्ता होगा साफ
इस निर्णय से उन उम्मीदवारों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं जो योग्य होने के बावजूद नौकरियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब उन रिक्त पदों पर नए संविदा कर्मियों की नियुक्ति संभव हो सकेगी, जिससे प्रशासनिक कार्यों की गति भी तेज होगी।
📌 सभी विभागों को सख्त निर्देश
कलेक्टर ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की उपस्थिति पर सतत निगरानी रखें। साथ ही यदि कोई कर्मचारी अनियमित पाया जाए, तो तत्काल संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
🧭 सुशासन की दिशा में कदम
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन के विजन के अनुरूप है, जिसमें पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और कार्य संस्कृति को प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रत्येक सरकारी कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी और निष्ठा से करे।
