मितानिन संघ ने राजधानी रायपुर में तीन सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और अनिश्चितकालीन काम बंद आंदोलन की चेतावनी दी।
रायपुर। मितानिन संघ ने अपनी तीन सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजधानी रायपुर में हुए इस प्रदर्शन में राज्यभर की मितानिनें बड़ी संख्या में शामिल हुईं। प्रदर्शनकारी मितानिनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को जल्द नहीं माना गया तो वे अनिश्चितकालीन काम बंद और कलम बंद आंदोलन शुरू करेंगी।
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📋 तीन सूत्रीय प्रमुख मांगे क्या हैं?
- मानदेय वृद्धि: मितानिनों ने लंबे समय से अपने वेतनमान में बढ़ोत्तरी की मांग की है। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में मौजूदा मानदेय पर्याप्त नहीं है।
- स्थायी नियुक्ति का दर्जा: मितानिनें सालों से स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें अब तक स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है।
- सुरक्षा और सामाजिक保障: फील्ड में कार्यरत मितानिनों को न तो बीमा, न ही पर्याप्त सुरक्षा साधन मिलते हैं। कोविड जैसे संकट में उनकी जान जोखिम में पड़ी, फिर भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
📣 प्रदर्शन का स्वरूप और नेतृत्व:
प्रदर्शन राजधानी के अंबेडकर चौक से शुरू होकर राज्य सचिवालय तक पहुंचा। रैली में शामिल मितानिनें हाथों में तख्तियां, बैनर और नारे लिखी पट्टियां लिए थीं।
छत्तीसगढ़ मितानिन संघ की अध्यक्ष रजनी यादव ने कहा:
“हम सरकार से भीख नहीं मांग रहीं, बल्कि अपने हक के लिए आवाज़ उठा रही हैं। अगर अब भी सरकार नहीं सुनती, तो आंदोलन तेज़ किया जाएगा।”
⚠️ काम बंद और कलम बंद आंदोलन की चेतावनी:
मितानिन संघ ने सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि तय समय सीमा में समाधान नहीं निकला, तो प्रदेशभर की मितानिनें:
- अनिश्चितकालीन काम बंद आंदोलन शुरू करेंगी
- स्वास्थ्य विभाग में कलम बंद आंदोलन भी होगा, जिसमें कागजी कामकाज ठप किया जाएगा
- गर्भवती महिलाओं, टीकाकरण, बच्चों की देखरेख जैसी सेवाएं प्रभावित होंगी
🩺 मितानिनों की भूमिका और महत्व:
छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली मितानिनें न सिर्फ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं देती हैं, बल्कि:
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिक्षा देती हैं
- महिला एवं बाल स्वास्थ्य का ध्यान रखती हैं
- पोषण, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखरेख जैसे अहम काम करती हैं
इसलिए इनके आंदोलन से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो सकती हैं।
🏛️ सरकारी प्रतिक्रिया:
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार मितानिनों की मांगों पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।
एक अधिकारी ने कहा, “मितानिनों की सेवा महत्वपूर्ण है। हम उनकी मांगों की समीक्षा कर रहे हैं और जल्द समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।”
🧠 विश्लेषण:
छत्तीसगढ़ में मितानिनें स्वास्थ्य सेवा की पहली पंक्ति में खड़ी हैं। उन्होंने कोविड जैसे संकटों में जान जोखिम में डालकर काम किया। ऐसे में उनकी मांगों को नजरअंदाज करना प्रशासन के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
आंदोलन का असर सिर्फ स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर भी पड़ेगा।
✊ आगे की रणनीति:
मितानिन संघ ने प्रदेशभर की इकाइयों से रायपुर पहुंचने का आह्वान किया है। यदि सरकार समय रहते कदम नहीं उठाती, तो राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा तैयार है।
