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NV Track GPS डिवाइस: सस्ते दाम में महंगी चालाकी, जानें पूरा सच

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 17 April 2025

NV Track GPS डिवाइस

आज के दौर में लोग अपनी गाड़ियों की सुरक्षा के लिए GPS ट्रैकिंग डिवाइस का सहारा ले रहे हैं। बाजार में कई अच्छे GPS ट्रैकर्स मौजूद हैं, लेकिन कुछ कंपनियां इस भरोसे का गलत फायदा उठा रही हैं। ऐसी ही एक कंपनी है NV Track, जो बेहद कम कीमत में GPS डिवाइस बेचती है, लेकिन बाद में ग्राहकों को सब्सक्रिप्शन के जाल में फंसा देती है।

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सस्ते दाम का झांसा

NV Track अपनी वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर “GPS ट्रैकर मात्र 1,518 रुपये में” जैसे आकर्षक ऑफर के साथ डिवाइस बेचता है। ग्राहक को लगता है कि यह एक बेहतरीन सौदा है और वह बिना ज्यादा सोचे समझे खरीदारी कर लेता है।

डिवाइस में पहले से होता है सिम कार्ड

NV Track का GPS डिवाइस एक सिम कार्ड के साथ आता है। कंपनी दावा करती है कि यह “प्लग एंड प्ले” डिवाइस है, यानी खरीदते ही काम करना शुरू कर देगा। लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है।

एक्टिवेशन के नाम पर अतिरिक्त चार्ज

डिवाइस ऑन करते ही ग्राहक को NV Track की ऐप डाउनलोड करनी पड़ती है। ऐप लॉग इन करते ही कंपनी का प्रतिनिधि संपर्क करता है और बताता है कि डिवाइस को एक्टिवेट करने के लिए सालाना सिम सब्सक्रिप्शन लेना अनिवार्य है, जिसकी कीमत 999 से 1,499 रुपये तक हो सकती है।

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ऐप सब्सक्रिप्शन का धोखा

ग्राहक जब तक सिम सब्सक्रिप्शन के झटके से उबरता है, कुछ महीनों बाद एक और संदेश आता है – “आपकी ऐप सब्सक्रिप्शन समाप्त हो गई है, कृपया रिन्यू करें।” यानी अब आपको ऐप इस्तेमाल करने के लिए भी अलग से भुगतान करना पड़ेगा।

कोई स्पष्ट जानकारी नहीं

NV Track की वेबसाइट, प्रोडक्ट पैकेजिंग और डिटेल्स में कहीं भी यह नहीं बताया जाता कि ग्राहक को अलग-अलग सब्सक्रिप्शन के लिए अतिरिक्त भुगतान करना होगा। ना ही किसी क्लियर टर्म्स एंड कंडीशंस का जिक्र होता है। पूरा सिस्टम इस तरह बनाया गया है कि ग्राहक को धीरे-धीरे मजबूर किया जाए।

ग्राहकों की प्रतिक्रिया

कई ग्राहकों ने ऑनलाइन रिव्यू में लिखा है कि उन्होंने NV Track को भरोसेमंद समझकर खरीदा, लेकिन बाद में सब्सक्रिप्शन के नाम पर लगातार पैसे देने पड़े। कुछ ने यह भी कहा कि सब्सक्रिप्शन न लेने पर डिवाइस पूरी तरह बंद हो गया।

ग्राहक सहायता भी नाकाम

जब ग्राहक कंपनी से सवाल करता है कि यह जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई, तो जवाब मिलता है – “यह कंपनी की पॉलिसी है, आप चाहें तो सब्सक्रिप्शन लें, नहीं तो डिवाइस काम नहीं करेगा।” यानी ग्राहक को कोई विकल्प नहीं दिया जाता।

क्या यह कानूनी है?

इस तरह की रणनीति उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के खिलाफ है। जब कोई कंपनी जरूरी जानकारी छिपाती है, तो यह misleading advertising और unfair trade practice के तहत आता है। ग्राहक को पूरी जानकारी देना कंपनी की जिम्मेदारी है।

उपभोक्ताओं के लिए सतर्कता जरूरी

अगर आप GPS डिवाइस खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • कंपनी की वेबसाइट पर टर्म्स और सब्सक्रिप्शन डिटेल्स ध्यान से पढ़ें।
  • सिम और ऐप दोनों की वैलिडिटी पहले ही जान लें।
  • ग्राहक रिव्यू खासकर निगेटिव जरूर पढ़ें।
  • ओपन-सोर्स या बिना सब्सक्रिप्शन वाले विकल्पों को प्राथमिकता दें।

अंत में एक चेतावनी – सस्ते ऑफर के पीछे छिपे खर्चों को पहचानें। खरीदारी से पहले पूरी जानकारी लें, ताकि आपके पैसे और भरोसे दोनों की कीमत न चुकानी पड़े।

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