रायपुर में हेलीपैड निर्माण टेंडर पर सवाल, उपराष्ट्रपति दौरे के 12 दिन बाद जारी टेंडर, प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल
रायपुर। राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में हेलीपैड निर्माण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। उपराष्ट्रपति के दौरे के बाद 12 दिनों की देरी से तीन हेलीपैड निर्माण के टेंडर जारी किए गए, जिससे पूरे मामले में पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर संदेह पैदा हो गया है।
बताया जा रहा है कि दौरा समाप्त होने के बाद फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाया गया, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
दौरे के बाद जारी हुआ टेंडर
सूत्रों के अनुसार:
- उपराष्ट्रपति का दौरा पहले ही संपन्न हो चुका था
- दौरे के 12 दिन बाद टेंडर जारी किया गया
- तीन हेलीपैड निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू
इससे यह सवाल उठ रहा है कि टेंडर समय पर क्यों नहीं जारी किया गया। 🚁
प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में कई बिंदुओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं:
- क्या टेंडर प्रक्रिया में देरी जानबूझकर की गई?
- क्या नियमों का सही तरीके से पालन हुआ?
- फाइलों की मूवमेंट में पारदर्शिता क्यों नहीं दिखी?
प्रशासनिक कार्यशैली पर चर्चा
दौरे के बाद अचानक फाइलों की गति तेज होने से यह संकेत मिलता है कि पहले प्रक्रिया धीमी थी, जिसे बाद में तेजी से पूरा किया गया।
संभावित अनियमितताओं की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है
- समयबद्धता का पालन होना चाहिए
- किसी भी प्रकार की अनियमितता की जांच होनी चाहिए
जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
कुछ जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग उठ रही है।
प्रशासन की सफाई का इंतजार
अब तक प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
भविष्य में सुधार की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए
- समय पर निर्णय लिए जाएं
- निगरानी तंत्र मजबूत किया जाए
निष्कर्ष
रायपुर में हेलीपैड निर्माण को लेकर सामने आए इस मामले ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जरूरत है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
