रायपुर में 42 स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट निर्माण व वितरण का कार्य मिला, महिलाओं को रोजगार, पोषण व्यवस्था मजबूत होगी और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
रायपुर | राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर पोषण सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिले के 42 स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट (Ready-to-Eat) पोषण आहार के निर्माण एवं वितरण का कार्य सौंपा गया है।
इस निर्णय से जहां एक ओर स्थानीय महिलाओं को स्थायी आजीविका के अवसर मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण पोषण आहार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह कार्य महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने और सरकारी योजनाओं में उनकी सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दिया गया है।
महिलाओं को मिलेगा रोजगार और नियमित आय
इस योजना के तहत चयनित 42 स्व-सहायता समूह रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री का निर्माण कर उसे आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचाएंगे।
इससे सैकड़ों महिलाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और उनकी मासिक आय में भी वृद्धि होगी।
अधिकारियों ने बताया कि सभी समूहों को—
- खाद्य सुरक्षा मानकों
- स्वच्छता एवं गुणवत्ता नियंत्रण
- पैकेजिंग एवं भंडारण प्रक्रिया
का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
पोषण अभियान को मिलेगी मजबूती
रेडी-टू-ईट खाद्य सामग्री का उपयोग मुख्य रूप से गर्भवती महिलाओं, शिशुवती माताओं तथा तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए किया जाता है।
स्थानीय स्तर पर निर्माण होने से आपूर्ति व्यवस्था अधिक सुचारु होगी और लंबे समय से चली आ रही वितरण संबंधी समस्याओं में भी सुधार होगा।
प्रशासन का मानना है कि इससे बच्चों में कुपोषण की समस्या को नियंत्रित करने में भी प्रभावी मदद मिलेगी।
स्थानीय उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
अब तक रेडी-टू-ईट सामग्री की आपूर्ति बड़े आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर थी। नई व्यवस्था के अंतर्गत इसका निर्माण जिले में ही किया जाएगा।
इससे—
- परिवहन लागत में कमी
- समय पर सप्लाई
- स्थानीय कच्चे माल की खपत
जैसे लाभ सामने आएंगे।
गुणवत्ता पर रहेगा विशेष नियंत्रण
अधिकारियों के अनुसार सभी 42 समूहों के लिए उत्पादन से लेकर वितरण तक स्पष्ट मानक तय किए गए हैं।
नियमित निरीक्षण और नमूना जांच की व्यवस्था भी की गई है, ताकि बच्चों और माताओं को सुरक्षित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जा सके।
इस पूरी व्यवस्था का संचालन राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास कार्यक्रमों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है।
महिला समूहों को मिलेगा प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग
रेडी-टू-ईट निर्माण से पहले सभी समूहों को—
- मशीनों के संचालन
- खाद्य प्रसंस्करण तकनीक
- पैकेजिंग डिजाइन
- लेखा एवं स्टॉक प्रबंधन
का प्रशिक्षण दिया गया है।
इसके साथ ही विभागीय स्तर पर तकनीकी टीम तैनात की गई है, जो समय-समय पर मार्गदर्शन और निगरानी करेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
प्रशासन का कहना है कि इस निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला आधारित उद्यमिता को नया बल मिलेगा।
स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार उत्पाद सीधे सरकारी योजना से जुड़ने के कारण बाजार की अनिश्चितता भी नहीं रहेगी।
यह मॉडल भविष्य में अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की तैयारी में है।
शासन की प्राथमिकता में महिला सशक्तिकरण
राज्य सरकार की मंशा है कि पोषण और महिला सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ा जाए। इसी उद्देश्य से स्व-सहायता समूहों को सरकारी आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनाया जा रहा है।
इस पहल को
छत्तीसगढ़ शासन
की महिला एवं बाल कल्याण नीतियों के तहत लागू किया जा रहा है।
अधिकारियों ने जताया भरोसा
जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि स्व-सहायता समूहों को इस जिम्मेदारी से न केवल आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि समाज में उनकी पहचान भी सुदृढ़ होगी।
रेडी-टू-ईट वितरण व्यवस्था के स्थानीयकरण से योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
आने वाले समय में बढ़ेगी संख्या
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले महीनों में और अधिक स्व-सहायता समूहों को भी इस कार्य से जोड़ा जाएगा, जिससे अधिक महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिल सकेगा।
