सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बाढ़ पर सभी राज्यों और केंद्र से जवाब मांगा, राहत और बचाव कार्य में लापरवाही पर फटकार लगाई।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ को लेकर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि “प्रकृति हमसे बदला ले रही है” और सभी प्रभावित राज्य सरकारों तथा केंद्र को तत्काल जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्य और केंद्र की तत्परता और प्रभावी प्रबंधन की जांच आवश्यक है। अदालत ने सभी राज्यों से यह रिपोर्ट मांगी है कि उन्होंने राहत कार्य, बचाव और सुरक्षा उपायों में क्या कदम उठाए और कितना संसाधन लगाया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी फटकार लगाई कि कई स्थानों पर बाढ़ से हुए नुकसान की समीक्षा और प्रभावी राहत वितरण में विलंब हुआ। अदालत ने यह कहा कि प्राकृतिक आपदा पर सरकारी कार्यवाही में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह कदम राज्य और केंद्र को चेतावनी देने जैसा है, ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रभावी और त्वरित कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में राज्य सरकारें अपनी आपदा प्रबंधन नीतियों और राहत कार्यों की रिपोर्ट तैयार करें।
अदालत ने यह आदेश ऐसे समय में दिया जब मानसून के मौसम में नदी-तालाबों का जलस्तर बढ़ रहा है और कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा और राहत सामग्री सुनिश्चित की जाए।
पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकारों ने अभी तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य जारी रखा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिपोर्ट सटीक और समय पर प्रस्तुत की जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सरकारों के लिए प्रकृति और जलवायु परिवर्तन के प्रति जवाबदेही का संकेत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदा पर सरकारी कार्यवाही में किसी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
