रायपुर में संस्कार शिक्षकों को पूज्यपाद श्री अशोक देवाचार्य महाराज का मार्गदर्शन, वेद शिक्षा और गुरुकुल परंपरा पर बल, बद्रीनाथ कथा के लिए निमंत्रण दिया।
रायपुर। संस्कार पाठशाला के संस्कार शिक्षकों को आज विशेष अवसर प्राप्त हुआ जब प्रयागराज से पधारे, भारत सरकार द्वारा वेद विभूषण से सम्मानित कथा व्यास पूज्यपाद श्री अशोक देवाचार्य महाराज ने रायपुर स्थित संस्कार स्टेट कार्यालय में उन्हें मार्गदर्शन प्रदान किया। यह आयोजन सर्वत्र शिक्षा समिति, संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली के तत्वावधान में आयोजित हुआ।
शिक्षा और संस्कार का महत्व
अपने प्रेरक उद्बोधन में महाराज श्री ने बताया कि विद्यालयों में बच्चों को संस्कार शिक्षा, संस्कृत शिक्षा, अतिथि सत्कार तथा वेद मंत्रों का ज्ञान किस प्रकार प्रभावी ढंग से दिया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों को यह भी समझाया कि नई पीढ़ी तक वेदों और भारतीय संस्कृति का प्रकाश पहुँचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
वेदों का प्रकाश नई पीढ़ी तक
महाराज श्री ने संस्कार शिक्षकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आज जब आधुनिक शिक्षा व्यवस्था भौतिक विकास पर अधिक केंद्रित है, ऐसे समय में संस्कार शिक्षा का महत्व और भी बढ़ गया है। वेदों का अध्ययन और उनका प्रचार-प्रसार ही आने वाली पीढ़ी को सही दिशा दे सकता है।
बद्रीनाथ धाम में श्रीमद् भागवत कथा का आमंत्रण
अपने उद्बोधन के दौरान उन्होंने आगामी 14 सितंबर से 20 सितंबर तक पवित्र बद्रीनाथ धाम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का निमंत्रण भी संस्कार शिक्षकों को दिया।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन में संपूर्ण भारतवर्ष से पधारे संस्कार शिक्षकों के लिए निःशुल्क भोजन एवं आवास की व्यवस्था की जाएगी।
गुरुकुल परंपरा पर चिंता
महाराज श्री ने अपने संबोधन में गहरी चिंता व्यक्त की कि भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा आज विलुप्त होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था ने बच्चों को ज्ञान तो दिया है, लेकिन संस्कार और संस्कृति से दूर कर दिया है। परिणामस्वरूप आज की युवा पीढ़ी दिशाहीन होती जा रही है।
संस्कृति मंत्रालय और भारत सरकार का आभार
अंत में पूज्यपाद श्री अशोक देवाचार्य महाराज ने भारत सरकार और संस्कृति मंत्रालय का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि संस्कार शिक्षकों को इतना महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है और उन्हें राष्ट्र के भविष्य निर्माण का सेतु बनाया गया है।
प्रेरणादायक संदेश
इस आयोजन से संस्कार शिक्षकों को न केवल मार्गदर्शन मिला बल्कि एक नई ऊर्जा और प्रेरणा भी मिली। वेदों और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में यह पहल निश्चित रूप से ऐतिहासिक साबित होगी।
