जिला अस्पताल में महिला गार्ड द्वारा मरीज को इंजेक्शन लगाने की घटना पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया, कलेक्टर से शपथपत्र सहित विस्तृत जवाब मांगा।
बिलासपुर. । छत्तीसगढ़ के एक जिला अस्पताल में घटित चौंकाने वाली घटना ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। एक महिला सुरक्षा गार्ड द्वारा मरीज को इंजेक्शन लगाने का मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने जिले के कलेक्टर से शपथपत्र सहित विस्तृत जवाब मांगा है।
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मामला तब सामने आया जब अस्पताल में भर्ती एक मरीज के परिजनों ने आरोप लगाया कि बिना किसी चिकित्सकीय योग्यता या प्रशिक्षण के महिला सुरक्षा गार्ड ने मरीज को इंजेक्शन दे दिया। इसके बाद मरीज की हालत बिगड़ने लगी और परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया।
सूत्रों के अनुसार, यह घटना अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। गार्ड की ड्यूटी केवल सुरक्षा व्यवस्था संभालने की थी, लेकिन उसने स्वास्थ्यकर्मी का काम करते हुए सीधे मरीज पर दवा का उपयोग कर दिया।
मामले के तूल पकड़ने के बाद कलेक्टर ने प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, हाईकोर्ट ने इस घटना को मरीजों के स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए स्वत: संज्ञान लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित गार्ड और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। वहीं, विपक्ष ने इस घटना को सरकार की लापरवाही बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग उठाई है।
गौरतलब है कि हाल ही में राज्य के कई अस्पतालों में व्यवस्थागत खामियों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। कभी डॉक्टरों की अनुपस्थिति तो कभी दवाओं की कमी, मरीज और उनके परिजन आए दिन परेशान होते रहते हैं। अब गार्ड द्वारा इंजेक्शन लगाने की घटना ने इन समस्याओं को और उजागर कर दिया है।
हाईकोर्ट द्वारा लिए गए इस स्वत: संज्ञान से उम्मीद जताई जा रही है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
