मुख्य न्यायाधिपति रमेश सिन्हा ने छत्तीसगढ़ में 40 घंटे के मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया, न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को तकनीकी और कानूनी प्रशिक्षण दिया।
रायपुर: छत्तीसगढ़ में मध्यस्थता और वैकल्पिक विवाद समाधान को बढ़ावा देने के लिए आयोजित 40 घंटे के मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य न्यायाधिपति श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने किया। कार्यक्रम का आयोजन राज्य न्यायालयों और संबंधित न्यायिक संस्थानों के सहयोग से किया गया।
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मुख्य न्यायाधिपति ने उद्घाटन अवसर पर कहा कि मध्यस्थता विधि का महत्व वर्तमान न्यायिक प्रणाली में लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विवादों का शीघ्र और संतुलित समाधान केवल न्यायालयों की सुनवाई से संभव नहीं है, बल्कि मध्यस्थता जैसी वैकल्पिक व्यवस्था भी न्याय प्राप्ति में अहम भूमिका निभाती है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और संबंधित पेशेवरों को मध्यस्थता की विधिक प्रक्रियाओं, तकनीकों और व्यवहारिक दृष्टिकोण से परिचित कराया जाएगा।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को बताया गया कि मध्यस्थता विवाद समाधान की प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और तटस्थता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि प्रशिक्षित मध्यस्थ न केवल विवादों को कम समय में सुलझा सकते हैं बल्कि इससे न्यायालयों पर बोझ भी कम होता है।
इस प्रशिक्षण में विभिन्न प्रकार के विवादों—व्यावसायिक, पारिवारिक, श्रम और सामुदायिक—की मध्यस्थता पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रतिभागियों को केस स्टडी, रोल-प्ले और सत्र आधारित शिक्षण के माध्यम से व्यावहारिक अनुभव देने की व्यवस्था की गई।
मुख्य न्यायाधिपति ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में मध्यस्थता की सफलता न्यायिक अधिकारियों और प्रशिक्षित मध्यस्थों की योग्यता पर निर्भर करती है। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अपने प्रशिक्षण का सही उपयोग करें और समाज में विवाद समाधान के सकारात्मक मॉडल प्रस्तुत करें।
कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल मध्यस्थता प्रक्रिया को लोकप्रिय बनाना है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में समय की बचत और न्याय की गति को बढ़ाना भी है। आयोजन में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, न्यायिक प्रशिक्षण विशेषज्ञ और राज्य प्रशासन के अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रतिभागियों ने उद्घाटन सत्र में मध्यस्थता के कानूनी ढांचे, प्रचलित नियमों और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों पर विशेष सेमिनार में भाग लिया। साथ ही, मध्यस्थता में नैतिकता, गोपनीयता और संवेदनशील मामलों को संभालने की तकनीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन से छत्तीसगढ़ न्यायपालिका में मध्यस्थता की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी और भविष्य में विवाद समाधान के क्षेत्र में नए मानक स्थापित होंगे।
