रक्षाबंधन पर डिप्टी CM विजय शर्मा को आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं और ‘दंतेश्वरी फाइटर्स’ की कमांडो बांधेंगी राखी, सामाजिक बदलाव का प्रतीक आयोजन।
दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़।रक्षाबंधन के पर्व पर इस बार छत्तीसगढ़ एक अद्भुत और प्रेरणादायक दृश्य का गवाह बनने जा रहा है। राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को रक्षाबंधन के दिन वे महिलाएं राखी बांधेंगी, जिन्होंने कभी नक्सलवाद की राह पकड़ी थी लेकिन अब समाज की मुख्यधारा में लौट चुकी हैं। साथ ही, इस आयोजन में ‘दंतेश्वरी फाइटर्स’ – नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात महिला कमांडो – भी भाग लेंगी और उपमुख्यमंत्री को राखी बांधकर अपना स्नेह और सम्मान प्रकट करेंगी।
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नक्सलियों से ‘रक्षकों’ तक का सफर
यह कार्यक्रम उन महिलाओं की कहानी भी बयां करता है जो पहले नक्सली संगठनों का हिस्सा थीं, लेकिन शासन की पुनर्वास नीति के तहत उन्होंने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। अब वे राज्य निर्माण की प्रक्रिया में सहभागी बन रही हैं। इन महिलाओं के द्वारा राखी बांधना न सिर्फ भावनात्मक पल होगा, बल्कि यह समाज में एक नई उम्मीद और बदलाव का प्रतीक भी बनेगा।
‘दंतेश्वरी फाइटर्स’: महिला शक्ति की मिसाल
‘दंतेश्वरी फाइटर्स’ महिला कमांडो दल उन युवतियों का समूह है जो बस्तर क्षेत्र की सुरक्षा में जुटी हैं। ये कमांडो नक्सल विरोधी अभियानों में भी भाग लेती हैं और सामाजिक कार्यक्रमों में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। रक्षाबंधन के मौके पर इन महिला कमांडोज़ द्वारा डिप्टी सीएम को राखी बांधना, एक मजबूत जनसंदेश देगा – सुरक्षा और भाईचारे का।
डिप्टी सीएम बोले – ‘राखी का यह रूप अविस्मरणीय’
डिप्टी मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पहल को अद्वितीय बताया। उन्होंने कहा –
“यह राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि परिवर्तन, विश्वास और पुनर्वास का प्रतीक है। समाज में लौट रही इन बहनों की राखी मेरे लिए अमूल्य है।”
बस्तर में शांति का प्रतीक बनेगा रक्षाबंधन
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब शांति और विकास की राह पर कदम बढ़ाया जा रहा है। यह राखी समारोह, राज्य सरकार की पुनर्वास नीति की सफलता और महिला सशक्तिकरण के प्रभाव को भी दर्शाता है।
रक्षा बंधन के माध्यम से समाज में संदेश
कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह आयोजन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एक सकारात्मक सामाजिक संदेश देगा। यह दर्शाएगा कि आत्मसमर्पण के बाद भी जीवन में बदलाव संभव है, और सरकार ऐसे लोगों को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
महिलाओं की भावनाएं – ‘अब हम निर्माण कर रहे हैं, विनाश नहीं’
आत्मसमर्पित एक महिला ने कहा –
“हमने गलत रास्ता अपनाया था, लेकिन अब हम भाई की कलाई पर राखी बांधकर नए रिश्ते और विश्वास की शुरुआत कर रहे हैं। यह सच्चा परिवर्तन है।”
