मृत व्यक्ति के नाम पर चल रहे अस्पताल का पर्दाफाश, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए कार्रवाई के निर्देश, बस्तर दौरे से पहले होगी सख्त कार्यवाही।
रायपुर। स्वास्थ्य सेवाओं में गड़बड़ी और लापरवाही की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन बस्तर में सामने आए एक मामले ने पूरे राज्य को चौंका दिया है। दरअसल, एक ऐसा अस्पताल संचालित हो रहा था जो एक मृत व्यक्ति के नाम से पंजीकृत है। इस गंभीर अनियमितता पर स्वास्थ्य मंत्री श्री शक्ति सिंह ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि बस्तर दौरे से लौटने से पहले इस अस्पताल के खिलाफ ठोस कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अस्पताल की असलियत खुली जांच में
बस्तर जिले के एक छोटे कस्बे में स्थित इस निजी अस्पताल की हकीकत तब सामने आई जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्रीय निरीक्षण के दौरान दस्तावेजों की जांच की। पंजीकरण के नाम पर जिस व्यक्ति का नाम सामने आया, उसकी मृत्यु तीन वर्ष पूर्व ही हो चुकी थी। लेकिन इसके बावजूद, उसी नाम से अस्पताल का संचालन हो रहा था और मरीजों का इलाज किया जा रहा था।
अवैध संचालन पर सवाल
जांच में पाया गया कि अस्पताल का संचालन बिना वैध चिकित्सकीय पंजीकरण, अप्रशिक्षित स्टाफ और बिना पर्याप्त संसाधनों के किया जा रहा था। अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं की भी व्यवस्था नहीं थी, और फिर भी सामान्य मरीजों के साथ-साथ गंभीर बीमारियों के मरीजों को भी भर्ती किया जा रहा था।
मंत्री का सख्त रुख
स्वास्थ्य मंत्री शक्ति सिंह ने बस्तर दौरे के दौरान ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उक्त अस्पताल के खिलाफ आपराधिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर कार्रवाई की जाए। मंत्री ने कहा –
“स्वास्थ्य सेवाओं से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मृत व्यक्ति के नाम से अस्पताल चलाना न सिर्फ अवैध है, बल्कि यह लोगों की जान से खिलवाड़ भी है। इस पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए राज्यभर में निजी अस्पतालों की सघन जांच की जाएगी।
जिम्मेदार अधिकारी भी रडार पर
इस घटना में सिर्फ अस्पताल संचालकों ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वर्षों तक यह अस्पताल संचालित होता रहा और किसी ने इसकी वैधता पर सवाल नहीं उठाया। स्वास्थ्य मंत्री ने इस दिशा में भी जांच के आदेश दिए हैं कि किसकी लापरवाही से ऐसा हो पाया।
स्थानीय जनता में रोष
स्थानीय नागरिकों ने भी इस घटना पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि यह अस्पताल न केवल झूठे नाम पर चल रहा था, बल्कि वहां इलाज के नाम पर लूट और लापरवाही आम थी। कई लोगों ने इलाज के दौरान पैसे तो खर्च किए, लेकिन न तो रिपोर्ट सही मिली और न ही उचित उपचार।
कार्रवाई की समय-सीमा तय
मंत्री ने जिला कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि वे 48 घंटे के भीतर इस अस्पताल पर कार्रवाई सुनिश्चित करें और रिपोर्ट मंत्रालय को भेजें। इसके अलावा, सभी जिलों में चल रहे निजी अस्पतालों और क्लिनिकों की सूची बनाकर उनकी वैधता की जांच करने का आदेश भी जारी किया गया है।
भविष्य की योजना
- राज्य में सभी निजी अस्पतालों की डिजिटल रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाएगा।
- स्वास्थ्य निरीक्षण रिपोर्ट हर छह महीने में अनिवार्य होगी।
- गलत पंजीकरण पाए जाने पर संचालकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर सख्त दंड दिया जाएगा।
