पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ईडी की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, कल डबल बेंच में सुनवाई, विजय शर्मा पर तीखी टिप्पणी की।
रायपुर।छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। बघेल ने ईडी की जांच प्रक्रिया को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करार देते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध की संज्ञा दी है। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच इस मामले की सुनवाई कल करेगी। बघेल की याचिका में ईडी के अधिकारी विजय शर्मा को निशाने पर लेते हुए उन पर “पूर्वाग्रह से ग्रसित” होने का आरोप लगाया गया है।
ईडी की कार्रवाई पर सवाल
भूपेश बघेल ने अपनी याचिका में उल्लेख किया है कि ईडी की छापेमारी और पूछताछ प्रक्रियाएं बिना किसी ठोस साक्ष्य के की गई हैं। उनका कहना है कि केंद्रीय एजेंसी राज्य में लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का औजार बन गई है।
विजय शर्मा पर गंभीर आरोप
बघेल ने ईडी के वरिष्ठ अधिकारी विजय शर्मा के व्यवहार को अनैतिक और दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस पर संज्ञान लेने की अपील की है। याचिका में यह भी कहा गया है कि शर्मा पूर्व में कई नेताओं के खिलाफ राजनीतिक दबाव में काम कर चुके हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
बघेल की इस कानूनी कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की संस्थागत रक्षा के लिए उठाया गया साहसी कदम है। वहीं, भाजपा ने इसे बचाव की रणनीति बताते हुए कहा कि जब भ्रष्टाचार उजागर हो रहा है, तब नेता अदालत की आड़ ले रहे हैं।
कांग्रेस का समर्थन
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, “ईडी को जांच करनी है तो निष्पक्षता दिखाए। लेकिन जब वह राजनीतिक दबाव में काम करेगी, तो हम हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।”
भाजपा का पलटवार
भाजपा प्रवक्ता सचिन चंद्राकर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को अगर कुछ नहीं छुपाना है, तो उन्हें जांच में सहयोग करना चाहिए। कोर्ट जाने से यह स्पष्ट होता है कि कुछ न कुछ गलत जरूर है।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन के अनुसार, यदि बघेल यह साबित कर पाते हैं कि ईडी की कार्रवाई में राजनीतिक दुर्भावना है, तो सुप्रीम कोर्ट एजेंसी की प्रक्रिया पर सवाल उठा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि एजेंसियों को संविधान के दायरे में रहकर ही काम करना होता है।
क्या है अगला कदम
इस याचिका पर सुनवाई कल डबल बेंच में होगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि क्या ईडी की कार्रवाई असंगत और लक्षित थी। यदि कोर्ट बघेल के पक्ष में जाता है, तो यह देश भर में कई नेताओं के लिए एक नजीर बन सकता है।
