गरियाबंद में 45 लाख के इनामी 9 हार्डकोर माओवादी हथियारों सहित आत्मसमर्पण, सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता, नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक बढ़त।
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। शासन की प्रभावी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तथा सुरक्षाबलों के लगातार दबाव के चलते प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) से जुड़े 9 हार्डकोर नक्सलियों ने गरियाबंद में हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी पर कुल 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था और ये वर्षों से हिंसक गतिविधियों में शामिल रहे थे।
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी सीनापाली एरिया कमेटी और एसडीके एरिया कमेटी से जुड़े थे। इनमें डिवीजनल कमेटी स्तर के नेता से लेकर एरिया कमेटी सदस्य और पार्टी मेंबर तक शामिल हैं। इन नक्सलियों के पास 6 ऑटोमेटिक और घातक हथियार – एके-47, एसएलआर और 303 राइफल – बरामद किए गए हैं।
आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख माओवादी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल हैं –
अंजू उर्फ कविता (8 लाख इनामी), बलदेव उर्फ वामनवट्टी (8 लाख), डमरू उर्फ महादेव (8 लाख), सोनी उर्फ बुदरी (8 लाख), रंजीत उर्फ गोविंद (5 लाख), पार्वती उर्फ सुक्की कारम (5 लाख), रतना उर्फ सोमडी कुंजाम (1 लाख), नवीता उर्फ डांगी मंडावी (1 लाख) और सरूपा (1 लाख)।
इनमें से कई माओवादी वर्ष 2004 से 2006 के बीच संगठन में शामिल हुए थे और बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और गरियाबंद जिलों में दर्जनों हिंसक घटनाओं में शामिल रहे। इन पर पुलिस थानों में 1 से लेकर 29 तक गंभीर अपराध दर्ज हैं, जिनमें हत्या, पुलिस पार्टी पर हमला, विस्फोट और फिरौती जैसी वारदातें शामिल हैं।
पुनर्वास नीति बनी बदलाव की वजह
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति, आत्मसमर्पित साथियों के सुरक्षित जीवन, आर्थिक सहायता, इलाज और सम्मानजनक पुनर्वास की सुविधाओं ने उन्हें हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि संगठन की विचारधारा अब खोखली लगने लगी थी और जंगल का जीवन केवल डर, संघर्ष और पीड़ा से भरा हुआ था।
लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों, गांव-गांव में लगाए गए पोस्टर और पंपलेट, तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के अनुभवों ने इनके मन में बदलाव पैदा किया।
सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता
इस आत्मसमर्पण अभियान में गरियाबंद पुलिस की ई-30 टीम, एसटीएफ, कोबरा 207 बटालियन, सीआरपीएफ की 65 और 211 बटालियन तथा 19 बीडी कैफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संयुक्त ऑपरेशन और लगातार दबाव ने संगठन की कमर तोड़ दी है।
आईजी अमरेश मिश्रा ने इसे वर्ष 2025–26 की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब तक जिले में कई नक्सली मारे जा चुके हैं और शेष ने आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्तमान में गरियाबंद जिले में कोई सक्रिय नक्सली संगठन शेष नहीं है। हालांकि सीतानदी एरिया कमेटी के विरुद्ध अभी भी अभियान जारी है।
शांति की ओर एक और कदम
यह आत्मसमर्पण न केवल सुरक्षाबलों की रणनीतिक सफलता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना ही स्थायी समाधान है। प्रशासन ने आत्मसमर्पण करने वालों को शासन की नीति के तहत पुनर्वास, आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण देने का भरोसा दिलाया है।
गरियाबंद में यह घटना नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे क्षेत्र में शांति, विकास और विश्वास का नया माहौल बनेगा।





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