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गणेश चतुर्थी-दुर्गा पूजा विसर्जन हेतु दिल्ली में 80 तालाब

देश ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 2 September 2025

दिल्ली सरकार ने गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा पर पर्यावरण बचाने के लिए 80 से ज्यादा कृत्रिम तालाब बनाए, यमुना में मूर्ति विसर्जन पर सख्त रोक।


नई दिल्ली सरकार ने इस साल गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा के अवसर पर पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बड़ा कदम उठाया है। यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने और धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करने के लिए राजधानी में 80 से अधिक कृत्रिम तालाब (Artificial Ponds) बनाए गए हैं। इन तालाबों में भक्तगण भगवान गणेश और मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन कर सकेंगे।

यमुना को बचाने की पहल

हर साल मूर्ति विसर्जन के दौरान यमुना नदी में भारी मात्रा में प्रदूषण फैलता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) और रसायनों से बनी मूर्तियों के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस बार दिल्ली सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी हालत में मूर्तियों का विसर्जन सीधे यमुना या अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों में नहीं किया जाएगा।

कहां-कहां बने तालाब

दिल्ली जल बोर्ड और नगर निगम के सहयोग से अलग-अलग ज़िलों और इलाकों में कृत्रिम तालाब बनाए गए हैं। इनमें उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी और पश्चिमी दिल्ली के प्रमुख इलाकों में बने स्थल शामिल हैं। प्रत्येक तालाब में साफ पानी, सुरक्षा व्यवस्था और सफाई की विशेष व्यवस्था की गई है।

श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएँ

दिल्ली सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि श्रद्धालुओं को पूजा और विसर्जन के दौरान किसी तरह की असुविधा न हो। कृत्रिम तालाबों पर—

  1. पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था
  2. सुरक्षा कर्मियों की तैनाती
  3. मूर्तियों के विसर्जन के लिए विशेष स्टाफ
  4. श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु शेड और पीने के पानी की व्यवस्था की गई है।

पर्यावरणविदों ने सराहा कदम

पर्यावरण विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह कदम धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाने में मदद करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर कृत्रिम तालाबों का प्रयोग नियमित रूप से बढ़ावा दिया जाए तो आने वाले वर्षों में यमुना की सेहत को काफी हद तक सुधारा जा सकता है।

मूर्ति निर्माताओं को भी निर्देश

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने मूर्ति निर्माताओं को भी पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से मूर्तियाँ बनाने के लिए निर्देशित किया है। इसमें मिट्टी, प्राकृतिक रंग और इको-फ्रेंडली सजावट का इस्तेमाल करने पर ज़ोर दिया गया है।

श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

कुछ भक्तों का मानना है कि यह कदम धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाए बिना पर्यावरण की रक्षा करता है। एक श्रद्धालु ने कहा—
“पहले विसर्जन केवल नदी में करने की सोच होती थी, लेकिन अब सरकार की पहल से यह समझ आया कि पूजन भी होगा और प्रकृति भी सुरक्षित रहेगी।”

पिछले साल का अनुभव

पिछले साल यमुना में सीधे विसर्जन पर रोक लगाई गई थी, लेकिन कई जगह नियमों का उल्लंघन देखा गया। इस बार प्रशासन ने पहले से ही पुख्ता तैयारी की है और अधिक तालाब बनाए हैं ताकि सभी श्रद्धालुओं को पास में सुविधा मिल सके।

प्रशासन की अपील

दिल्ली सरकार और नगर निगम ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यमुना या अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में मूर्ति विसर्जन न करें और केवल कृत्रिम तालाबों का ही प्रयोग करें।

भविष्य की योजना

सरकार की योजना है कि आने वाले समय में सभी धार्मिक उत्सवों के लिए स्थायी कृत्रिम तालाब बनाए जाएँ। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी बल्कि हर साल अस्थायी तालाब बनाने पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी।

धार्मिक उत्सव और पर्यावरण का संतुलन

गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा भारतीय संस्कृति के प्रमुख उत्सव हैं। लाखों भक्त इन अवसरों पर मूर्तियों की स्थापना और विसर्जन करते हैं। ऐसे में यदि विसर्जन को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाए तो यह पूरे समाज के लिए सकारात्मक बदलाव होगा।


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