GST दरों में बदलाव से आम जनता को राहत, लेकिन SBI रिपोर्ट के अनुसार होगा 48,000 करोड़ का राजस्व घाटा। जानिए अर्थव्यवस्था पर असर।
नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दरों में हाल ही में किए गए बदलावों पर देशभर में बहस तेज हो गई है। एक ओर आम जनता को इससे बड़ी राहत मिल रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के राजस्व पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। इसी कड़ी में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि इन बदलावों से करीब 48,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हो सकता है।
SBI रिपोर्ट का अनुमान
SBI की इकोनॉमिक रिसर्च विंग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, नई जीएसटी दरें लागू होने से कर संग्रहण पर गहरा असर पड़ेगा। रिपोर्ट का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और आवश्यक वस्तुओं पर कर में कटौती से सरकार को भारी राजस्व हानि झेलनी पड़ सकती है। हालांकि, इसका प्रत्यक्ष लाभ आम जनता को मिलेगा क्योंकि रोजमर्रा की वस्तुएं सस्ती होंगी।
आम जनता को मिलेगा फायदा
GST काउंसिल के फैसले के बाद अब कई दवाएं, शिक्षा संबंधी सेवाएं और कुछ रोजमर्रा की चीजें टैक्स फ्री या कम टैक्स दर पर उपलब्ध होंगी। इससे मिडिल क्लास और गरीब तबके को काफी राहत मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से लोगों की बचत बढ़ेगी और खर्च करने की क्षमता भी।
राज्यों पर असर
राज्यों के लिए यह बदलाव चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। फिलहाल जीएसटी कलेक्शन में से एक निश्चित हिस्सा राज्यों को मिलता है। यदि संग्रहण में कमी आती है, तो राज्यों की विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि वह राजस्व घाटे की भरपाई के लिए राज्यों को सहायता देने पर विचार कर सकती है।
अर्थव्यवस्था पर असर
SBI की रिपोर्ट कहती है कि अल्पकालिक राजस्व नुकसान के बावजूद लंबे समय में इस कदम से अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है। टैक्स रेट कम होने से उपभोक्ता मांग में वृद्धि होगी और इससे बाजार की रफ्तार तेज होगी। उद्योग और व्यापार जगत को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
सरकार का रुख
सरकार का कहना है कि टैक्स ढांचे में सुधार का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन को आसान बनाना भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि जीएसटी सुधारों से भारत का टैक्स ढांचा अधिक पारदर्शी और सरल बनेगा।
विशेषज्ञों की राय
- अर्थशास्त्री मानते हैं कि राजस्व घाटा अस्थायी होगा और आने वाले वर्षों में बढ़ी हुई खपत से इसकी भरपाई हो जाएगी।
- व्यापारी संगठन इसे सकारात्मक कदम मानते हैं क्योंकि इससे बिक्री में इजाफा होगा।
- सामान्य जनता का मानना है कि यह कदम महंगाई से राहत दिलाएगा।
निष्कर्ष
SBI की रिपोर्ट ने भले ही 48,000 करोड़ रुपये के घाटे की ओर इशारा किया है, लेकिन सरकार और विशेषज्ञों का विश्वास है कि इससे लंबे समय में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। फिलहाल यह बदलाव जनता के लिए राहत और सरकार के लिए चुनौती दोनों लेकर आया है।
