कांकेर जिले में जांच के बाद 300 राशन कार्ड रद्द, अपात्र और फर्जी कार्डधारकों पर कार्रवाई तेज, प्रशासन ने आगे और कार्ड निरस्त करने के संकेत दिए।
कांकेर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी कड़ी में कांकेर जिले में जांच के बाद 300 राशन कार्ड रद्द कर दिए गए हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई अभी जारी रहेगी और आने वाले दिनों में अपात्र हितग्राहियों के और भी राशन कार्ड निरस्त किए जा सकते हैं।
जिला खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य सरकार के निर्देश पर की गई, जिसमें फर्जी, डुप्लीकेट और अपात्र राशन कार्डधारकों की पहचान की जा रही है। जांच में पाया गया कि कई हितग्राही पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतर रहे थे, जबकि कुछ मामलों में एक ही परिवार के नाम पर एक से अधिक कार्ड पाए गए। वहीं कुछ राशन कार्ड ऐसे लोगों के नाम पर दर्ज थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो जिले से स्थायी रूप से बाहर चले गए हैं।
खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन हितग्राहियों की आय तय सीमा से अधिक है, जो सरकारी सेवा में हैं, या जिनके पास चारपहिया वाहन और पर्याप्त भूमि है, वे इस योजना के दायरे में नहीं आते। ऐसे सभी मामलों की ब्लॉक और ग्राम स्तर पर पुनः जांच कराई जा रही है। प्रशासन ने ग्राम पंचायत सचिवों, पटवारियों और उचित मूल्य दुकानदारों से सहयोग लेकर सूची तैयार की है।
कांकेर जिले में की गई इस कार्रवाई के बाद अब अन्य जिलों में भी सघन जांच अभियान चलाने की तैयारी है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार का उद्देश्य जरूरतमंद और वास्तविक गरीब परिवारों तक ही सस्ती दर पर राशन पहुंचाना है। फर्जी और अपात्र कार्डधारकों के कारण पात्र लोगों का हक प्रभावित होता है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खाद्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी के पास अपात्र राशन कार्ड है, तो वे स्वयं उसे निरस्त कराने के लिए आगे आएं। साथ ही यह भी कहा गया है कि जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें राशन की वसूली और कानूनी कदम भी शामिल हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई से जिले में हड़कंप मचा हुआ है। कई हितग्राही अपने दस्तावेज दुरुस्त कराने और पात्रता साबित करने के लिए खाद्य विभाग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इस सख्ती से सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अधिक पारदर्शी होगी और वास्तविक जरूरतमंदों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।


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