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कच्ची नहर से 25% पानी वेस्टेज, 60 किमी लाइनिंग

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 22 April 2026

बालोद में 60 किमी कच्ची नहर से 25 प्रतिशत पानी बर्बाद, हर साल 1350 करोड़ लीटर नुकसान, किसानों ने लाइनिंग कार्य जल्द पूरा करने की मांग

रायपुर / बालोद। प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था सुधारने के दावों के बीच एक बड़ी समस्या सामने आई है। कच्ची नहरों के कारण करीब 25 प्रतिशत पानी रास्ते में ही बर्बाद हो रहा है। जानकारी के अनुसार लगभग 60 किलोमीटर नहर की लाइनिंग अब तक पूरी नहीं हो पाई है, जिसके चलते हर साल करीब 1350 करोड़ लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा और कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है।

हर साल पानी की भारी बर्बादी

सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कच्ची नहरों के कारण पानी रिसाव और टूट-फूट की समस्या बनी रहती है। इससे बड़ी मात्रा में पानी जमीन में समा जाता है या रास्ते में ही नष्ट हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नहरों की लाइनिंग कर दी जाए तो पानी की बर्बादी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

बताया जा रहा है कि:

  • 60 किलोमीटर नहर अब भी कच्ची है
  • 25 प्रतिशत पानी रिसाव में बर्बाद हो रहा
  • हर साल 1350 करोड़ लीटर पानी नष्ट
  • किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा

इस स्थिति से किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसल प्रभावित होती है। 🌾

किसानों पर पड़ रहा असर

बालोद और आसपास के क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि नहरों से पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण उन्हें वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ता है। कई किसान ट्यूबवेल और पंप के माध्यम से सिंचाई कर रहे हैं, जिससे लागत बढ़ रही है।

किसानों ने बताया:

  • समय पर पानी नहीं मिलता
  • सिंचाई लागत बढ़ गई
  • फसल उत्पादन प्रभावित
  • गर्मी के मौसम में स्थिति और खराब

किसानों ने प्रशासन से जल्द नहर लाइनिंग कार्य पूरा करने की मांग की है।

वर्षों से अधूरा लाइनिंग कार्य

जानकारी के अनुसार नहर लाइनिंग का कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। कई बार बजट स्वीकृत होने के बावजूद कार्य पूरा नहीं हो पाया। इससे हर साल पानी की बर्बादी जारी है।

अधिकारियों का कहना है कि:

  • चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा
  • बजट मिलने पर कार्य तेज होगा
  • प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में काम शुरू

हालांकि, किसानों का कहना है कि काम की गति धीमी है और जल्द समाधान की जरूरत है।

जल संरक्षण पर भी असर

कच्ची नहरों के कारण पानी की बर्बादी से जल संरक्षण के प्रयास भी प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नहरों की लाइनिंग की जाए तो जल प्रबंधन बेहतर हो सकता है और अधिक क्षेत्र में सिंचाई संभव होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • लाइनिंग से पानी बचाया जा सकता है
  • सिंचाई क्षेत्र बढ़ेगा
  • भूजल स्तर में सुधार होगा
  • किसानों की आय बढ़ेगी

प्रशासन से मांग तेज

किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते लाइनिंग कार्य पूरा नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिए:

  • लाइनिंग कार्य में तेजी लाई जाए
  • निगरानी व्यवस्था मजबूत हो
  • समय सीमा तय की जाए
  • किसानों को नियमित जानकारी दी जाए

समाधान की दिशा में प्रयास

सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि समस्या को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही अधूरे कार्यों को पूरा करने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए अतिरिक्त बजट की मांग भी की गई है।

अधिकारियों के अनुसार:

  • सर्वे कार्य जारी
  • प्राथमिकता तय की जा रही
  • चरणबद्ध निर्माण योजना

निष्कर्ष

कच्ची नहरों के कारण हर साल 1350 करोड़ लीटर पानी की बर्बादी चिंता का विषय है। यदि समय रहते 60 किलोमीटर नहर की लाइनिंग पूरी कर दी जाए तो किसानों को राहत मिल सकती है और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। 💧

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