रायपुर में मंत्रालय के चपरासी ने क्लर्क बनकर हॉस्टल वार्डन की नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 20 लाख की ठगी की। आरोपी गिरफ्तार।
रायपुर। राजधानी रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक से 20 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोपी कोई उच्च अधिकारी नहीं, बल्कि मंत्रालय में काम करने वाला एक चपरासी निकला, जिसने खुद को क्लर्क बताकर युवक को भरोसे में लिया और मंत्रालय के अधिकारियों से संबंध होने का दावा किया।
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पीड़ित युवक ने जब कई महीनों तक नौकरी नहीं लगने पर पैसा वापस मांगा, तो आरोपी ने टालमटोल शुरू कर दी। आखिरकार युवक ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
📌 कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
मामला रायपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक सरकारी हॉस्टल में वार्डन की नौकरी पाने की इच्छा रखता था। इसी दौरान उसकी पहचान एक व्यक्ति से हुई जो खुद को मंत्रालय में क्लर्क बताता था।
आरोपी ने दावा किया कि उसकी मंत्रालय के अधिकारियों से सीधी पहुंच है और वह चाहें तो किसी को भी “कन्फर्म नौकरी” दिला सकता है। पीड़ित से कहा गया कि हॉस्टल वार्डन की पोस्ट निकली है, लेकिन आवेदन और प्रक्रिया को अंदरखाने से करवाना होगा, जिससे चयन पक्का रहेगा।
💰 20 लाख में पक्की नौकरी का वादा:
आरोपी ने पीड़ित को यह भी बताया कि उसे 20 लाख रुपये देने होंगे जिसमें आवेदन, प्रक्रिया, और अधिकारी को “मुग्ध करने” का खर्च शामिल है। पीड़ित युवक ने अपने परिजनों से उधार लेकर और जेवर गिरवी रखकर रकम का इंतजाम किया।
रकम आरोपी को तीन किश्तों में दी गई। पैसे मिलते ही आरोपी ने “जॉइनिंग लेटर” का वादा किया, लेकिन कई हफ्ते बीतने के बाद भी न तो कोई पत्र मिला, न ही नौकरी का कोई संकेत।
🕵️♂️ शिकायत पर खुला मामला:
पीड़ित ने जब कई बार संपर्क किया और जवाब नहीं मिला, तो संदेह हुआ। युवक ने मंत्रालय जाकर जब उसकी जांच की, तब सच्चाई सामने आई कि आरोपी तो केवल चपरासी है, क्लर्क नहीं।
इसके बाद उसने सिविल लाइंस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जांच शुरू की, और आरोपी को हिरासत में लिया गया।
👮♂️ पुलिस का बयान:
थाना प्रभारी, सिविल लाइंस:
“आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसने अपना अपराध कबूल किया है। उसके पास से कुछ दस्तावेज और लेन-देन से जुड़े सबूत भी जब्त किए गए हैं।”
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या उसने अन्य लोगों के साथ भी ऐसी ठगी की है।
⚖️ कानूनी धाराएं लागू:
इस पूरे मामले में आरोपी पर निम्नलिखित धाराएं लगाई गई हैं:
- IPC 420 – धोखाधड़ी
- IPC 468 – जालसाजी
- IPC 471 – फर्जी दस्तावेजों का उपयोग
- IPC 406 – विश्वासघात
साथ ही न्यायालय में पेशी के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
🚨 सरकारी व्यवस्था पर सवाल:
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्रालय जैसे संवेदनशील स्थान में काम करने वाला एक चपरासी कैसे इतना आत्मविश्वास से ठगी कर सकता है, यह जांच का विषय है।
🧑💼 प्रशासन और विभागीय जांच की मांग:
घटना के बाद नौकरी की तैयारी कर रहे छात्रों और अभ्यर्थियों ने प्रशासन से मांग की है कि:
- मंत्रालय परिसर में काम करने वालों का पृष्ठभूमि सत्यापन हो।
- फर्जीवाड़े से जुड़ी हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए।
- विभागीय स्तर पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हो।
📢 निष्कर्ष नहीं, सावधानी की ज़रूरत:
सरकारी नौकरी की चाह में कई युवा ऐसे फर्जी दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। इस घटना से यह साफ होता है कि पहचान और पहुंच के नाम पर ठग सक्रिय हैं। आम लोगों को ऐसे झांसे से बचने की आवश्यकता है। कोई भी भर्ती प्रक्रिया यदि पारदर्शी न लगे, तो तत्काल संबंधित विभाग या पुलिस में सूचना दें।
