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रायपुर महिला से ठगे 2.83 करोड़, डिजिटल अरेस्ट केस

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 29 July 2025

रायपुर की महिला डिजिटल ठगी का शिकार हुई, 2.83 करोड़ की चपत, यूपी के 5 ठगों ने बनाई 40 फर्जी कंपनियां, जांच जारी।

रायपुर। राजधानी में एक महिला के साथ हाई-प्रोफाइल डिजिटल ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने उसे “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर करीब ₹2.83 करोड़ की रकम ठग ली। यह गिरोह उत्तर प्रदेश का है, जिसने 40 से ज्यादा फर्जी कंपनियों के माध्यम से पैसों का लेन-देन किया।

क्या है ‘डिजिटल अरेस्ट’?

डिजिटल अरेस्ट एक नई तरह की ऑनलाइन ठगी का तरीका है, जिसमें कॉलर खुद को साइबर अपराध अधिकारी, CBI या पुलिस अधिकारी बताता है। कॉल के माध्यम से पीड़ित को डराया जाता है कि उसके नाम से किसी गंभीर अपराध की सूचना है, जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी, या विदेशी पार्सल में संदिग्ध वस्तु मिलना।

कैसे हुई ठगी?

रायपुर निवासी एक शिक्षित महिला को कॉल आया कि उनके नाम से एक संदिग्ध पार्सल ताइवान भेजा गया है, जिसमें ड्रग्स हैं। कॉलर ने खुद को CBI अधिकारी बताया और पीड़ित महिला को वीडियो कॉल पर 6 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।

उससे कहा गया कि अगर वह निर्दोष है तो कोर्ट में ट्रांजैक्शन प्रूफ जमा करे। ठगों ने उसे डराकर कई बार अलग-अलग अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर कराए।

40+ फर्जी कंपनियां, 5 आरोपी गिरफ्तार

जांच के दौरान सामने आया कि यूपी में बैठे 5 साइबर अपराधियों ने 40 से अधिक शेल कंपनियां बनाई थीं। इन कंपनियों के नाम पर बैंक अकाउंट खोले गए और उन्हीं में महिला के ट्रांसफर किए गए करोड़ों रुपये जमा हुए।

साइबर पुलिस और EOW ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से फर्जी दस्तावेज, मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंक पासबुक जब्त किए गए हैं।

अब तक कितना रिकवर?

अब तक ₹43 लाख की राशि होल्ड की जा चुकी है, जिसे महिला के बैंक में वापस ट्रांसफर करने की प्रक्रिया चल रही है। बाकी रकम को ट्रैक करने के लिए ED और RBI को सूचना भेजी गई है।

साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह

  • किसी भी अनजान कॉल पर विश्वास न करें।
  • कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पेमेंट नहीं मांगती।
  • संदिग्ध कॉल की तुरंत शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर करें।
  • डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों में शांत रहें और परामर्श लें।

पुलिस की कार्रवाई

छत्तीसगढ़ साइबर पुलिस ने इसे देश का एक हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड केस माना है। आरोपियों के मोबाइल से कई अन्य लोगों के साथ भी ठगी की जानकारी मिली है, जिनकी जांच की जा रही है।

निष्कर्ष

यह केस आधुनिक साइबर अपराध के खतरों को दर्शाता है। डिजिटल साक्षरता और सतर्कता ही ऐसे अपराधों से सुरक्षा की पहली सीढ़ी है। सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप, और फर्जी कॉल के माध्यम से हो रही ऐसी ठगियों से आम जनता को सचेत रहने की आवश्यकता है।

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