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सोमवार से लोकसभा की कार्यवाही सामान्य रूप से चलेगी। गतिरोध के बाद सहमति ऐतिहासिक मानी जा रही।

देश ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 25 July 2025

स्पीकर ओम बिरला की सर्वदलीय बैठक में सहमति बनी—सोमवार से लोकसभा की कार्यवाही सामान्य रूप से चलेगी। गतिरोध के बाद सहमति ऐतिहासिक मानी जा रही।

  • 🏛️ लोकसभा में सोमवार से सामान्य कार्यवाही शुरू: स्पीकर की बैठक में सर्वदलीय सहमति, संसद गतिरोध पर विराम

📌 भूमिका

कई दिनों की कड़वाहट, टकराव और हंगामे के बाद आखिरकार भारतीय संसद के निचले सदन — लोकसभा — में सोमवार से नियमित कार्यवाही शुरू होने जा रही है।
यह निर्णय 25 जुलाई 2025 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद लिया गया, जहां सभी प्रमुख दलों ने संसद को सुचारू रूप से चलाने पर सहमति व्यक्त की।

इस कदम को संसदीय लोकतंत्र की जीत और जनमत के सम्मान की दिशा में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।


🔄 अब तक क्यों नहीं चल रही थी संसद

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत 18 जुलाई 2025 को हुई थी, लेकिन पहले ही दिन से विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई थी। मुख्य मुद्दे थे:

  • मणिपुर हिंसा पर प्रधानमंत्री का बयान
  • पेगासस निगरानी विवाद की जांच
  • किसानों की फसल क्षति पर चर्चा
  • आर्थिक मंदी और बेरोजगारी के आंकड़े

इन सभी मुद्दों पर विपक्ष लगातार स्थगन प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा था, जबकि सरकार एजेंडा आगे बढ़ाने पर अडिग थी। इसका नतीजा यह हुआ कि सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होती रही।

🤝 बैठक में क्या हुआ?

25 जुलाई को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया। बैठक में शामिल प्रमुख नेता:

  • प्रह्लाद जोशी (संसदीय कार्य मंत्री)
  • मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस अध्यक्ष)
  • सुदीप बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस)
  • तेजस्वी सूर्या (बीजेपी युवा मोर्चा)
  • असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM)
  • के सुरेश (कांग्रेस चीफ व्हिप)
  • ओमप्रकाश राजभर (NDA सहयोगी)

बैठक में विपक्ष ने यह मांग दोहराई कि महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कराई जाए, जबकि सरकार ने भरोसा दिलाया कि चर्चा होगी, लेकिन नियमों और प्रक्रिया के तहत।

अंततः यह सहमति बनी कि सोमवार से (28 जुलाई) सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से चलेगी, और सभी प्रमुख मुद्दों पर निर्धारित समय पर चर्चा होगी।

📊 क्यों अहम है यह सहमति?

संसद की कार्यवाही बाधित होना न केवल कानून निर्माण को रोकता है, बल्कि लोकतंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।

इस सत्र में सरकार को निम्नलिखित विधेयक पारित कराने हैं:

  • तीन कृषि सुधार विधेयकों में संशोधन
  • यूनिफॉर्म सिविल कोड पर प्रारंभिक चर्चा
  • नये डेटा प्रोटेक्शन कानून
  • महिला आरक्षण पर रिपोर्ट प्रस्तुति

यदि संसद नहीं चलती, तो ये सभी कानून अटक सकते थे। ऐसे में यह सहमति संसदीय कार्यकाल की एक बड़ी प्रगति है।


🎙️ नेताओं की प्रतिक्रियाएं

ओम बिरला (लोकसभा अध्यक्ष):

🧠 संसद में गतिरोध का इतिहास

भारतीय संसद में गतिरोध कोई नई बात नहीं है। लेकिन हाल के वर्षों में यह एक राजनीतिक रणनीति बन गई है। उदाहरण के लिए:

  • 2010: 2G घोटाले पर पूरा सत्र ठप
  • 2016: नोटबंदी पर बहस की मांग को लेकर विरोध
  • 2021: कृषि कानूनों पर लगातार हंगामा

हर बार की तरह इस बार भी जनता का सबसे बड़ा नुकसान होता है — न तो नई नीतियों पर चर्चा होती है, न ही कानून बन पाते हैं।


🧾 क्या बदलेगा अब?

  1. बहस का माहौल बनेगा: हर पक्ष को अपनी बात कहने का मौका मिलेगा
  2. महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित होंगे: विकास कार्यों और कानून व्यवस्था को गति मिलेगी
  3. जनता को भरोसा मिलेगा: संसद सचमुच “जनता की आवाज़” है
  4. टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सकारात्मक संदेश जाएगा

📈 मीडिया और जनता की नजरें संसद पर

सोशल मीडिया पर भी संसद की कार्यवाही को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही थीं। #ParliamentStalemate और #LetParliamentWork जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे।

जनता की आम भावना थी

अब जबकि कार्यवाही सुचारू रूप से चलने वाली है, जनता को उम्मीद है कि उनके प्रतिनिधि अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे।


🔍 लोकसभा की कार्यवाही क्यों होती है बाधित?

  • विपक्ष की चर्चा की मांग को ठुकराया जाना
  • सरकार द्वारा बिल बिना बहस पारित करना
  • विपक्ष द्वारा रणनीतिक विरोध
  • मीडिया कवरेज की चाहत
  • संसदीय प्रक्रिया के नियमों की जटिलता

🛠️ संसद सुधार की जरूरत

  1. सत्र में न्यूनतम कामकाजी घंटे सुनिश्चित हों
  2. हंगामे की स्थिति में वेतन कटौती का प्रावधान
  3. सभी पार्टियों के बीच पूर्व-निर्धारित एजेंडा तय हो
  4. जनता को रिपोर्ट कार्ड के रूप में जानकारी दी जाए

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