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लंदन में इतिहास बनेगा: मोदी–स्टारमर मिलेंगे, भारत–यूके FTA पर बड़े हस्ताक्षर

देश ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 24 July 2025

मोदी–स्टारमर लंदन में FTA पर हस्ताक्षर करेंगे; व्यापार में US$34 अरब वृद्धि, स्कॉच‑जिन पर टैक्स कटौती; रणनीतिक साझेदारी Vision 2035 लॉन्च।

लंदन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान लंदन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर से मुलाक़ात की, जिसमें दोनों देशों ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए। यह भारत का यूरोपीय देश के साथ पहला व्यापक FTA है, जिसे 23 जुलाई को कैबिनेट द्वारा स्वीकृत किया गया था और 24 जुलाई को लंदन में औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित किया गया ।


🔹 समझौते का मापदंड

  • टैक्स में भारी कटौती:
    • भारत में स्कॉच व्हिस्की और जिन पर 150% या उससे अधिक शुल्क था, अब यह घटकर 75% हो रहा है और आने वाले 10 वर्षों में यह 40% तक लाया जाएगा ।
    • ऑटोमोबाइल पर आयात शुल्क 100% से घटकर 10% तक छोड़ा गया, खासकर कोटा–बाधित हिस्सों में
    • भारत की 99% निर्यात वस्तुओं (कपड़े, कृषि, गहने ईवी) पर यूके में ड्यूटी फ्री पहुँच मिलेगी ।

🔹 व्यापार एवं निवेश को मिलेगा बल

  • दोनों देशों के व्यापार में वार्षिक US$34 अरब वृद्धि की संभावना जताई गई है, जबकि ब्रिटिश अनुमान £25.5 बिलियन तक की वृद्धि देख रहा है ।
  • UK की GDP में भी £4.8 बिलियन वार्षिक वृद्धि की उम्मीद है ।

🔹 सेवा क्षेत्र और मौलिक लाभ

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  • इस समझौते में व्यावसायिक वीज़ा आसान/चिकित्सा/इनोवेशन पेशेवरों के लिए विशेष व्यवस्था शामिल है, हालांकि संपत्ति अधिकृत करने की अनुमति अभी सीमित ।
  • भारतीय कंपनियों को यूके सरकारी खरीद और निवेश अवसरों तक पहुंच मिलेगी ।
  • इसमें Social Security exemption की व्यवस्था भी है, अर्थात कामगारों के भुगतान खाते में दोहरी कटौती से राहत ।

🔹 रणनीतिक भागीदारी: Beyond Trade

  • समन्वित रूप से योजनाबद्ध “UK‑India Vision 2035” रोडमैप लॉन्च किया गया, जिसमें रक्षा, जलवायु, तकनीक, इनोवेशन और शिक्षा को जोड़ने का प्रस्ताव शामिल है।
  • Climate and Defence cooperation roadmap भी सम्मिलित किया गया ।

🔹 राजनीतिक–आर्थिक महत्व

  • यह ब्रिटेन का Brexit के बाद सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता है ।
  • भारत के लिए यह पहला पूर्ण FTA यूरोपीय देश के साथ है ।
  • भारत-यूके के बीच चल रही रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिलेगी और यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को और व्यापक बनाएगा।

🔹 अगले कदम: लागू करने की प्रक्रिया

  • दोनों देशों के संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता है — भारत में राष्ट्रपति अनुमोदन के बाद लागू होगा।
  • यूके में Labour पार्टी की बहुमत के आधार पर पारित की स्थिति है, जो मर ratification पर आश्वासन देती है ।
  • यह लागू होते ही वस्तु और सेवा आयात-निर्यात में बदलाव स्वचालित रूप से प्रभावी होगा।

🧭 कुल मिलाकर—क्यों है यह महत्वपूर्ण

🔹 क्षेत्र🌐 प्रभाव और अवसर
व्यापार वृद्धिनिर्यात बढ़ेगा; भारत-यूके के व्यापारिक स्वास्ठ्य को मजबूती
जॉब क्रिएशनउत्पादन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेंगे
निवेश प्रवाहड्यूटी कटौती, खरीद सुलभ एवं परियोजना निवेश
वैज़ा और सोशल सुरक्षाविशेषज्ञों को आसान वीज़ा; कार्यकर्ता को राहत
रणनीतिक गठबंधनरक्षा, जलवायु, तकनीकी सहयोग मजबूत

✅ निष्कर्ष

भारत–यूके FTA समझौता न सिर्फ़ व्यापार का दस्तावेज़ है, बल्कि यह नई वैश्विक साझेदारी की चाबी भी है।
यह समझौता अप्रत्याशित लाभों के साथ-साथ दोनों देशों को दीर्घकालिक आर्थिक–राजनीतिक साझेदारी की दिशा में अग्रसरित करेगा।





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