कमल विहार में सरकारी ज़मीन को निजी बताकर बेचा गया, अतिक्रमण हटाने पर सामने आया धोखाधड़ी का बड़ा मामला।
रायपुर(मेघा तिवारी की रिपोर्ट)। कमल विहार क्षेत्र में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी जमीन को निजी बताकर लोगों को बेच दिया गया। इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब नगर निगम की अतिक्रमण हटाने वाली टीम ने अचानक मौके पर पहुँचकर मकानों को तोड़ना शुरू किया। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, उन्हें यह जमीन प्राइवेट प्रॉपर्टी बताकर बेची गई थी और बाकायदा उसकी रजिस्ट्री भी करवाई गई थी।
करीब एक साल पहले इस जमीन पर निर्माण कार्य शुरू हुआ और कुछ मकान बनकर तैयार भी हो गए। लेकिन इस पूरे समय के दौरान न तो किसी तरह की आपत्ति दर्ज की गई और न ही किसी प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई हुई। अचानक नगर निगम की टीम द्वारा मकानों को तोड़ने की कार्रवाई ने निवासियों को हिलाकर रख दिया।
💬 पीड़ितों की आपबीती:
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें जमीन बेचने वाले व्यक्ति ने स्पष्ट रूप से यह दावा किया था कि यह एक निजी ज़मीन है, जो उनके स्वामित्व में है। कई लोगों ने अपनी वर्षों की जमा पूंजी लगाकर मकान बनवाया, लेकिन अब उन्हें पता चला कि वे एक सरकारी ज़मीन पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए थे।
एक पीड़ित महिला मेघा तिवारी ने कहा, “हमें न तो कोई नोटिस मिला, न कोई सूचना। सुबह-सुबह बुलडोज़र आ गया और हमारा घर गिरा दिया गया। हमने यह जमीन पूरी तरह वैध तरीके से खरीदी थी और इसकी रजिस्ट्री भी हुई थी। अब अचानक पता चला कि यह सरकारी जमीन है।”
🚜 प्रशासन की कार्रवाई:
जोन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यह जमीन नगर निगम की है और उस पर अवैध कब्जा किया गया था। ज़ोन अधिकारी ने बताया कि कई बार निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। जब रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी गई, तब जाकर कार्रवाई की अनुमति मिली और बुलडोज़र चलाया गया।
📜 धोखाधड़ी की जाँच की माँग:
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले की विस्तृत जाँच की जाए और जिस व्यक्ति ने उन्हें यह जमीन बेची है, उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते एक साल तक यह निर्माण कार्य चलता रहा, उनकी भी जवाबदेही तय की जाए।

📉 आर्थिक नुकसान और मानसिक आघात:
इस घटना से प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी ज़िंदगी भर की कमाई इस मकान में लगा दी थी। अब न केवल उनका घर उजड़ गया है, बल्कि वे आर्थिक और मानसिक तनाव में भी हैं। कई लोगों ने बैंक से लोन लेकर यह प्रॉपर्टी खरीदी थी, और अब वे भारी कर्ज़ में डूब चुके हैं।

📢 प्रशासन की सफाई:
अधिकारियों का कहना है कि जमीन की स्थिति सार्वजनिक रिकॉर्ड में स्पष्ट थी और किसी भी खरीददार को ज़मीन खरीदने से पहले उसकी सत्यता की जाँच करनी चाहिए थी। नगर निगम का यह भी कहना है कि जिन लोगों ने रजिस्ट्री करवाई है, वे संबंधित दस्तावेज़ों के साथ थाने में शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
👥 भविष्य की कार्रवाई:
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि इस मामले की जाँच की जाएगी और अगर किसी बिचौलिए या प्रॉपर्टी डीलर ने धोखाधड़ी की है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की धोखाधड़ी से लोगों को बचाने के लिए ज़मीन की ऑनलाइन वेरिफिकेशन प्रक्रिया को सख्त किया जाएगा।
