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बीडीएम अस्पताल की लापरवाही से 22 माह के मासूम

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 2 August 2025

बीडीएम अस्पताल की लापरवाही से मासूम की मौत, परिजनों में शोक और आक्रोश, नगरवासियों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जताया विरोध, जांच के आदेश जारी।

रायगढ़, छत्तीसगढ़। बीडीएम जिला अस्पताल में लापरवाही की एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। इलाज में देरी और स्टाफ की उदासीनता के चलते 22 माह के एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर इलाज नहीं मिला, जिससे बच्चे की जान चली गई। इस दर्दनाक घटना से पूरे नगर में आक्रोश फैल गया है। अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लोगों ने नारेबाजी की और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

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मासूम की मौत से टूटा परिवा

मासूम की पहचान कृष्णा नामक बालक के रूप में हुई है, जो बुखार और उल्टी से पीड़ित था। परिजन उसे सुबह गंभीर अवस्था में बीडीएम अस्पताल लाए थे, लेकिन डॉक्टरों ने गंभीरता नहीं दिखाई। पहले पर्ची बनवाने के लिए कहा गया, फिर घंटों तक कोई इलाज शुरू नहीं किया गया। जब तक इलाज शुरू हुआ, तब तक मासूम ने दम तोड़ दिया।

परिजनों का गंभीर आरोप

मृतक के पिता रमेश साहू का कहना है, “हम अस्पताल पहुंचे तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। स्टाफ ने इमरजेंसी की हालत में भी हमें पर्ची बनवाने और फार्म भरने के लिए भेज दिया। बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन कोई डॉक्टर नहीं आया। आखिरकार, हमारे सामने हमारे बच्चे ने दम तोड़ दिया।”

अस्पताल प्रबंधन का पक्ष

अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि “घटना की जानकारी मिलते ही उच्च स्तरीय जांच टीम गठित कर दी गई है। यदि स्टाफ की लापरवाही पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। हम परिजनों की पीड़ा समझते हैं और उन्हें न्याय दिलाया जाएगा।”

जनता में आक्रोश

घटना के बाद जैसे ही खबर फैली, बड़ी संख्या में नगरवासी अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए। लोगों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह पहली बार नहीं है जब बीडीएम अस्पताल में लापरवाही के चलते किसी की जान गई हो। “कब तक ऐसे मासूम मरते रहेंगे?”—एक बुजुर्ग प्रदर्शनकारी ने गुस्से में कहा।

विपक्ष ने उठाए सवाल

स्थानीय विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए हैं। एक स्थानीय नेता ने कहा, “सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सरकार को तुरंत कड़े कदम उठाने चाहिए।”

सोशल मीडिया पर भी गूंज

इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा हो रही है। ट्विटर और फेसबुक पर लोगों ने अस्पताल की आलोचना की और पीड़ित परिवार के साथ संवेदना जताई। कई लोगों ने स्वास्थ्य मंत्री को टैग कर कार्रवाई की मांग की।

विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इमरजेंसी मामलों में अस्पतालों को प्राथमिकता के साथ इलाज करना चाहिए। “22 माह के बच्चे के लक्षण गंभीर थे, उसे तुरन्त ट्रीटमेंट मिलना चाहिए था,”—एक बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा।

अब क्या होगा?

जिला प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। परिजनों ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।

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