ईडी ने मोक्षित कॉर्पोरेशन पर मारा छापा, 650 करोड़ के घोटाले की जांच तेज, कई दस्तावेज और डिजिटल डाटा जब्त, जांच जारी
छत्तीसगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को आर्थिक अनियमितताओं के एक बड़े मामले में कार्रवाई करते हुए मोक्षित कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई करीब 650 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़ी हुई है।
ईडी के सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग (धनशोधन) रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है और इसमें कंपनी के निदेशकों, संबंधित संस्थाओं और सहायक फर्मों के परिसरों को शामिल किया गया है।
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किन-किन स्थानों पर हुई छापेमारी?
ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली, मुंबई, गुजरात और राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में एक साथ की गई। दिल्ली स्थित मोक्षित कॉर्पोरेशन के मुख्यालय सहित, उसके प्रमोटरों के आवास और दफ्तरों पर भी तलाशी अभियान चलाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान के दौरान संदिग्ध बैंक लेन-देन, जाली दस्तावेज, संपत्ति के पेपर और डिजिटल डेटा बरामद किए गए हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है।
650 करोड़ के घोटाले की जड़ में कौन?
ईडी को प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि मोक्षित कॉर्पोरेशन ने फर्जी कंपनियों के माध्यम से बड़े पैमाने पर फंड ट्रांसफर किया, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया।
इसके अलावा, कंपनी पर फर्जी प्रोजेक्ट दिखाकर निवेशकों को गुमराह करने, बैंकों से लोन लेकर उनका दुरुपयोग करने और टैक्स चोरी करने के भी आरोप हैं।
ईडी की इस जांच की शुरुआत उस FIR के आधार पर हुई थी, जो पहले किसी राज्य की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने दर्ज की थी।
ईडी का आधिकारिक बयान
ईडी ने इस छापेमारी की पुष्टि करते हुए एक बयान में कहा,
“प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में मोक्षित कॉर्पोरेशन लिमिटेड और उससे जुड़ी इकाइयों के 10 से अधिक ठिकानों पर तलाशी ली है। जांच के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। जांच जारी है।”
कंपनी की ओर से सफाई
वहीं, मोक्षित कॉर्पोरेशन ने ईडी की कार्रवाई को “पूर्वाग्रह से ग्रसित” बताया है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा,
“हम पूरी जांच में सहयोग कर रहे हैं। हमें यकीन है कि अंतिम रूप से सच्चाई सामने आएगी और कंपनी निर्दोष साबित होगी।”
निवेशकों में चिंता, शेयरों में गिरावट
ईडी की छापेमारी की खबर सामने आते ही मोक्षित कॉर्पोरेशन से जुड़े निवेशकों में घबराहट फैल गई। अगर कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होती, तो उसके शेयरों में गिरावट तय मानी जाती, लेकिन यह कंपनी अनलिस्टेड है। फिर भी इससे जुड़े प्राइवेट निवेशकों और पार्टनर्स में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कई निवेशक समूहों ने सरकार से मांग की है कि वह इस मामले में जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करे और अगर कोई धोखाधड़ी हुई है तो उन्हें मुआवजा दिलाया जाए।
पहले भी जांच के घेरे में रही कंपनी
मोक्षित कॉर्पोरेशन इससे पहले भी टैक्स चोरी, बोगस बिलिंग और फर्जी GST इनपुट क्लेम के मामलों में विभागीय जांच के दायरे में आ चुकी है। यह पहली बार है जब कंपनी के खिलाफ केंद्रीय स्तर पर ईडी जैसी एजेंसी ने सीधा एक्शन लिया है।
क्या है मनी लॉन्ड्रिंग का मामला?
मनी लॉन्ड्रिंग यानी अवैध रूप से अर्जित धन को वैध दिखाने की प्रक्रिया। PMLA के तहत यदि यह साबित हो जाता है कि किसी धनराशि का स्रोत आपराधिक है, तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है, जिसमें संपत्ति जब्ती से लेकर गिरफ्तारी तक के प्रावधान हैं।
ईडी के अनुसार, मोक्षित कॉर्पोरेशन ने फर्जी खातों और शेल कंपनियों के माध्यम से धन को एक से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर उसका स्रोत छिपाने का प्रयास किया।
अगला कदम क्या होगा?
जांच के अगले चरण में ईडी उन बैंक खातों को फ्रीज़ कर सकती है जिनसे संदिग्ध लेन-देन किए गए हैं। साथ ही, निदेशकों और प्रमुख अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन जारी किए जाएंगे।
यदि साक्ष्य पर्याप्त पाए जाते हैं, तो कंपनी की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। जांच पूरी होने पर अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
निष्कर्ष नहीं, लेकिन मामला गंभीर
ईडी की यह कार्रवाई केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि आर्थिक अपराधों और घोटालों के खिलाफ सरकार का रुख सख्त है।
मोक्षित कॉर्पोरेशन पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं, और यदि ये साबित होते हैं तो यह देश के निवेश और बैंकिंग सिस्टम पर एक और बड़ा झटका होगा।
