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छत्तीसगढ़ हाईवे पर वाहन से 25 मवेशियों की मौत

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 28 July 2025

छत्तीसगढ़ में नेशनल हाइवे पर तेज रफ्तार वाहन ने 25 मवेशियों को कुचला, घटना से गौ रक्षकों में गहरा आक्रोश फैल गया है

रायपुर।छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से लापरवाह वाहन चालकों की बेरहमी सामने आई है। नेशनल हाइवे पर एक अज्ञात तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से 25 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा देर रात हुआ, जिसने क्षेत्र में सनसनी फैला दी। घटना की सूचना मिलते ही गौ रक्षा संगठनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने दोषियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हादसा कैसे हुआ?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह दुर्घटना तब हुई जब कुछ मवेशी रात के समय हाइवे किनारे बैठे हुए थे। तभी तेज रफ्तार में आ रहा एक अज्ञात वाहन सीधे मवेशियों के झुंड से टकरा गया। टक्कर इतनी भयानक थी कि अधिकांश मवेशियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कुछ गंभीर रूप से घायल हो गए।

स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और घायल पशुओं को इलाज के लिए नजदीकी पशु अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन अधिकतर को बचाया नहीं जा सका।

घटनास्थल पर मचा कोहराम

सुबह जब स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर हर कोई दहल गया। चारों ओर मवेशियों के शव बिखरे पड़े थे, खून से सनी सड़क देखकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मौके पर पहुंचे गौ रक्षक संगठनों ने प्रशासन और ट्रैफिक विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

गौ रक्षकों का आक्रोश और विरोध प्रदर्शन

घटना के बाद गौ रक्षक दलों और स्थानीय संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए दोषी वाहन चालक की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही और क्रूरता है।

गौ रक्षा समिति के अध्यक्ष ने कहा—

प्रशासन की प्रतिक्रिया

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और हाइवे पर लगे CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि उस वाहन की पहचान की जा सके, जिसने टक्कर मारी।
एसएचओ ने बताया—

आवारा मवेशी या प्रशासन की अनदेखी?

यह सवाल भी उठता है कि हाइवे जैसे खतरनाक मार्ग पर इतने मवेशी कैसे घूम रहे थे?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह प्रशासन की नाकामी है।

पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने इस मामले को पशु क्रूरता अधिनियम और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत दर्ज किया है। जानकारों का मानना है कि यदि इसे लापरवाही से अधिक माना गया, तो दोषी को 5 साल तक की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।

इस घटना से जुड़े सामाजिक और धार्मिक पहलू

भारत में गाय और मवेशी सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टिकोण से भी पूज्य माने जाते हैं। इस घटना ने सिर्फ मानवता को नहीं, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी आहत किया है। इसलिए यह मामला सामान्य सड़क हादसे से अधिक गंभीर बन गया है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के नेशनल हाइवे पर हुआ यह हादसा एक सिस्टम की विफलता और मानवीय संवेदना की कमी को दर्शाता है। मवेशियों की जान जाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि सामाजिक रूप से भी निंदनीय है। अब देखना होगा कि प्रशासन दोषियों पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

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