भारत-मालदीव संबंधों में फिर से गर्माहट: पीएम मोदी की संभावित यात्रा और ‘इंडिया आउट’ कैंपेन के बदलते समीकरण

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पीएम मोदी की संभावित मालदीव यात्रा से भारत-मालदीव संबंधों में आई तल्खी कम होने के संकेत, ‘इंडिया आउट’ अभियान अब कमजोर पड़ता दिख रहा है।

नई दिल्ली। भारत और मालदीव के बीच पिछले कुछ महीनों से चल रही कूटनीतिक तनातनी अब नरमी की ओर जाती दिख रही है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद ‘इंडिया आउट’ अभियान के तहत भारत के खिलाफ जो सख्त रुख देखने को मिला था, अब उसमें बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा की संभावनाएं प्रबल हो रही हैं, दोनों देशों के रिश्ते में एक नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।

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🔍 ‘इंडिया आउट’ अभियान और मुइज्जू सरकार की शुरुआत

राष्ट्रपति मुहम्मद मुइज्जू जब 2023 में सत्ता में आए, तो उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान भारत के खिलाफ तीखा रुख अपनाया था। ‘इंडिया आउट’ अभियान के तहत उन्होंने भारतीय सैन्य कर्मियों को मालदीव से बाहर निकालने का वादा किया था।

यह मुद्दा उनकी चुनावी रणनीति का प्रमुख हिस्सा था, और सत्ता में आने के बाद उन्होंने अपने रुख को लागू भी किया। मालदीव की जमीन पर मौजूद भारतीय सैन्य उपस्थिति को समाप्त करने का निर्णय भारत के साथ रिश्तों में खटास का कारण बना।

लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, मुइज्जू सरकार को महसूस हुआ कि भारत के साथ दूरी बनाना कूटनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से नुकसानदेह हो सकता है। यही वजह है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के संबंधों में नरमी के संकेत मिलने लगे।


🤝 पीएम मोदी की संभावित मालदीव यात्रा

सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निकट भविष्य में मालदीव की यात्रा पर जा सकते हैं। यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी को कम करने और आपसी सहयोग को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

यह यात्रा दक्षिण एशिया में भारत की कूटनीतिक सक्रियता का भी प्रतीक होगी। मालदीव, भौगोलिक रूप से भले ही छोटा देश हो, लेकिन सामरिक दृष्टिकोण से उसकी स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीन की बढ़ती उपस्थिति को देखते हुए भारत मालदीव के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखना चाहता है।


🛡️ भारत की सामरिक भूमिका और मालदीव की चिंता

मालदीव में भारत की सैन्य उपस्थिति हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है। हालांकि भारत का कहना है कि उसकी सैन्य उपस्थिति मानवीय सहायता, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा सहयोग तक सीमित है, लेकिन मालदीव में कुछ राजनीतिक दलों ने इसे संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में पेश किया।

मुइज्जू सरकार ने इसी मुद्दे को भुनाया और भारत के खिलाफ जनभावनाओं को हवा दी। लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें यह भी महसूस हुआ कि भारत के बिना विकास परियोजनाएं और सुरक्षा सहयोग अधूरा है।

भारत ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि वह मालदीव की संप्रभुता का सम्मान करता है और सभी सहायता उनके अनुरोध पर ही प्रदान की जाती है।


🌐 चीन की बढ़ती मौजूदगी और भारत की कूटनीतिक रणनीति

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने मालदीव में अपनी रणनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को मजबूत किया है। चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परियोजनाओं में मालदीव की भागीदारी और ऋण सहायता को भारत ने गहरी नजर से देखा है।

भारत यह नहीं चाहता कि उसके पड़ोसी देशों में चीन का प्रभाव बढ़े और उसके रणनीतिक हितों को नुकसान पहुंचे। इसलिए पीएम मोदी की संभावित यात्रा को चीन के प्रभाव को संतुलित करने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।


💬 दोनों देशों के मंत्रियों की बयानबाजी में नरमी

हाल के हफ्तों में दोनों देशों के मंत्रियों की बयानबाजी में भी नरमी आई है। मालदीव के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्रालय ने आपसी सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल दबाव के कारण नहीं, बल्कि व्यावहारिक कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के उद्देश्य से हो रहा है।


🏝️ पर्यटन और विकास परियोजनाओं पर असर

भारत मालदीव का एक प्रमुख विकास भागीदार रहा है। चाहे वह बुनियादी ढांचे के निर्माण की बात हो, जल परियोजनाएं हों या शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं — भारत ने हमेशा सहयोग किया है।

‘इंडिया आउट’ अभियान के बाद कुछ परियोजनाओं में रुकावटें आई थीं, लेकिन अब ये फिर से गति पकड़ रही हैं। भारत द्वारा वित्तपोषित पुल और सड़क परियोजनाएं फिर से पटरी पर लौटती दिख रही हैं।

पर्यटन के क्षेत्र में भी भारत से आने वाले पर्यटकों की संख्या में गिरावट देखी गई थी, लेकिन इस गर्मी के मौसम में फिर से पर्यटक लौटते दिख रहे हैं।


✅ निष्कर्ष नहीं — संकेत एक नई शुरुआत के

भले ही अब तक भारत और मालदीव के बीच पूर्ण सामंजस्य स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन संकेत यही हैं कि दोनों देश अब अतीत की तल्खियों को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत की ओर बढ़ना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की संभावित यात्रा इस दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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Raja Shakti Raj Singh
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राजा शक्ति राज सिंह "दबंग सूचना" के संस्थापक और स्वामी हैं। वे निष्पक्ष, निर्भीक और जन-समर्पित पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं। उनका उद्देश्य सच्चाई को आम जनता तक पहुंचाना है। डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है और उन्होंने "दबंग सूचना" को विश्वसनीय समाचार स्रोत के रूप में स्थापित किया है।
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