जशपुरनगर के नीमगांव जलाशय में विश्व वेटलैंड दिवस पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में आर्द्रभूमि संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता पर जागरूकता दी गई।
जशपुरनगर। विश्व वेटलैंड दिवस के अवसर पर जशपुर जिले के नीमगांव जलाशय परिसर में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) के संरक्षण, संवर्धन और उनके सतत उपयोग के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम में जल संसाधन, वन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग तथा स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों, मछुआरों, स्वयं सहायता समूहों और विद्यार्थियों ने सहभागिता की। विशेषज्ञों ने बताया कि वेटलैंड न केवल जल संरक्षण में सहायक होते हैं, बल्कि जैव विविधता, पक्षी संरक्षण, मत्स्य पालन और ग्रामीण आजीविका के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान नीमगांव जलाशय के पारिस्थितिक महत्व, जल की गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय, जलाशय में अवैध अतिक्रमण रोकने, प्लास्टिक प्रदूषण नियंत्रण तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता से संरक्षण के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि वेटलैंड्स प्राकृतिक जल भंडारण केंद्र की तरह कार्य करते हैं, जिससे भू-जल स्तर में सुधार होता है और बाढ़ व सूखे की स्थिति से निपटने में मदद मिलती है। साथ ही यह क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित आवास भी प्रदान करता है।
कार्यशाला में उपस्थित प्रतिभागियों को जलाशय क्षेत्र का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्हें स्थानीय वनस्पति, जलीय जीवों और पक्षी प्रजातियों के बारे में जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि आमजन छोटे-छोटे प्रयासों से वेटलैंड संरक्षण में योगदान दे सकते हैं, जैसे कचरा जलाशयों में न फेंकना और रासायनिक अपशिष्ट से बचाव करना।
अधिकारियों ने कहा कि नीमगांव जलाशय जिले की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि है और इसके संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी बेहद जरूरी है। भविष्य में भी इस तरह की जागरूकता और प्रशिक्षण गतिविधियों को निरंतर आयोजित करने की योजना बनाई गई है।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने वेटलैंड संरक्षण की शपथ ली और नीमगांव जलाशय को स्वच्छ एवं सुरक्षित बनाए रखने का संकल्प व्यक्त किया।
