बिलासपुर में विधायक सुशांत शुक्ला ने बांस शिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिससे कारीगरों और युवाओं को स्वरोजगार व बाजार से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
बिलासपुर | स्थानीय कारीगरों को स्वरोजगार से जोड़ने और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिलासपुर में बांस शिल्प प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन क्षेत्रीय विधायक सुशांत शुक्ला ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रशिक्षार्थी, कारीगर एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
विधायक सुशांत शुक्ला ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बांस शिल्प छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पहचान है और इससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और जनप्रतिनिधियों का लक्ष्य है कि पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए, ताकि शिल्पकारों की आय में वृद्धि हो सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को बांस से दैनिक उपयोग की वस्तुएं, सजावटी सामग्री, फर्नीचर, टोकरी, लैंप शेड और हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही डिजाइन, फिनिशिंग और मार्केटिंग से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी।
कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी, जिससे पारंपरिक बांस शिल्प को नए स्वरूप में विकसित किया जा सके। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हैं और युवाओं को पलायन से रोकने में मददगार साबित होते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी इस तरह के कौशल विकास कार्यक्रमों को निरंतर प्रोत्साहन दिया जाएगा।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय मेलों, प्रदर्शनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ने की भी योजना है, जिससे कारीगरों को सीधे बाजार मिल सके।
इस अवसर पर नगर निगम, उद्योग विभाग एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण युवक-युवतियां मौजूद रहे।
