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शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में बड़ा एक्शन, फर्जी डिग्री पर

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 9 January 2026

धमतरी में शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले पर बड़ा खुलासा, फर्जी डिग्री से 18 साल नौकरी कर रहे 8 प्रधानपाठकों की सेवाएं समाप्त, आगे और कार्रवाई संभव।

धमतरी। छत्तीसगढ़ में वर्षों पुराने शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा कदम उठाया है। धमतरी जिले में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे 8 प्रधानपाठकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। हैरानी की बात यह है कि ये सभी शिक्षक पिछले करीब 18 वर्षों से शासकीय सेवा में कार्यरत थे और अब जांच में इनके प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं।

कैसे सामने आया घोटाला

जिला शिक्षा विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ शिक्षाकर्मी फर्जी डिग्रियों के आधार पर नियुक्त हुए हैं। इसके बाद उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई, जिसने संबंधित शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेजों की गहन जांच की। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि 8 प्रधानपाठकों ने मान्यता प्राप्त संस्थानों से डिग्री प्राप्त नहीं की थी और फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी हासिल की थी।

18 साल तक निभाते रहे जिम्मेदारी

इन शिक्षकों ने प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में प्रधानपाठक के रूप में वर्षों तक सेवाएं दीं। वे न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते रहे, बल्कि सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य से भी जुड़े रहे। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने इसे गंभीर कदाचार मानते हुए सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया।

प्रशासन का सख्त संदेश

जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह ईमानदार अभ्यर्थियों के अधिकारों का भी हनन है। उन्होंने संकेत दिए कि आगे और भी मामलों की जांच चल रही है और दोषी पाए जाने वालों पर इसी तरह की कार्रवाई होगी।

कानूनी कार्रवाई के संकेत

सूत्रों के अनुसार, सेवा समाप्ति के साथ-साथ इन शिक्षकों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और वेतन वसूली की प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। यदि फर्जीवाड़ा जानबूझकर किया गया पाया गया, तो संबंधित व्यक्तियों को जेल भी जाना पड़ सकता है।

शिक्षा व्यवस्था पर असर

इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। कई अन्य शिक्षाकर्मी भी अपने दस्तावेजों को लेकर सतर्क हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और भरोसे को मजबूत करेगा।

आगे की राह

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में सभी शिक्षाकर्मियों के प्रमाणपत्रों का पुनः सत्यापन किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि योग्य और ईमानदार शिक्षकों के हाथों में ही बच्चों का भविष्य सौंपा जाए।

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