गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन, जनजातीय वीर नायकों पर आधारित देश का पहला डिजिटल संग्रहालय कर्तव्य पथ पर दिखेगा।
गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की अनूठी प्रस्तुति
रायपुर। नई दिल्ली में आयोजित 26 जनवरी गणतंत्र दिवस परेड के लिए छत्तीसगढ़ की झांकी का चयन हो गया है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ की झांकी देशभर के दर्शकों के लिए खास आकर्षण बनने जा रही है। झांकी की थीम “जनजातीय वीर नायक और डिजिटल संग्रहालय” रखी गई है, जो देश का पहला ऐसा डिजिटल संग्रहालय होगा, जिसे कर्तव्य पथ पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
जनजातीय वीरों को मिलेगा राष्ट्रीय सम्मान
झांकी के माध्यम से छत्तीसगढ़ के उन जनजातीय वीर नायकों को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिन्होंने देश की आज़ादी, सामाजिक न्याय और संस्कृति की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। इसमें वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर, बिरसा मुंडा जैसे महान योद्धाओं की गाथाएं आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित की जाएंगी।
डिजिटल तकनीक से सजेगा संग्रहालय
इस झांकी की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसमें डिजिटल स्क्रीन, एलईडी पैनल और आधुनिक विजुअल इफेक्ट्स का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम से जनजातीय इतिहास, संस्कृति, शौर्य और बलिदान की कहानियां डिजिटल स्वरूप में दिखाई जाएंगी। यह संग्रहालय पारंपरिक कला और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम होगा।
संस्कृति और आधुनिकता का संगम
झांकी में छत्तीसगढ़ की लोक कला, वेशभूषा, नृत्य और संगीत को भी स्थान दिया गया है। साथ ही, डिजिटल माध्यम से जनजातीय समाज की जीवनशैली, रीति-रिवाज और ऐतिहासिक योगदान को दर्शाया जाएगा। इससे दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को नज़दीक से जानने का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार की पहल
राज्य सरकार का मानना है कि यह झांकी न केवल छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगी, बल्कि युवाओं को जनजातीय इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का भी कार्य करेगी। अधिकारियों के अनुसार, झांकी के चयन से पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल है।
राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की पहचान
कर्तव्य पथ पर छत्तीसगढ़ की यह झांकी देश और दुनिया के सामने राज्य की सांस्कृतिक विरासत, तकनीकी नवाचार और जनजातीय गौरव को प्रदर्शित करेगी। यह झांकी छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।
