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साहिबजादों के बलिदान दिवस पर गरियाबंद में शौर्य प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ ✍ Raja Shakti Raj Singh 🕐 27 December 2025

गरियाबंद में वीर बाल दिवस पर साहिबजादों के बलिदान को नमन, बाइक रैली और तिरंगा चौक पर कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

गरियाबंद। दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह महाराज के चार साहिबजादों—साहिबज़ादा अजीत सिंह, साहिबज़ादा जुझार सिंह, साहिबज़ादा जोरावर सिंह और साहिबज़ादा फतेह सिंह—के अतुलनीय बलिदान की स्मृति में वीर बाल दिवस गरियाबंद में श्रद्धा, शौर्य और गौरव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सिख एवं सिंधी समाज के संयुक्त तत्वावधान में भव्य आयोजन हुआ, जिसमें नगरवासियों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

कार्यक्रम की शुरुआत गरियाबंद स्थित गुरुद्वारा से हुई। यहां साहिबजादों की शहादत को नमन करते हुए विशेष अरदास की गई। इसके बाद नगर में भव्य बाइक रैली निकाली गई, जिसमें सिख एवं सिंधी समाज के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोग भी शामिल हुए। रैली गुरुद्वारा से प्रारंभ होकर सिविल लाइन, गौरवपथ, शारदा चौक होते हुए बस स्टैंड स्थित तिरंगा चौक पहुंची। रैली के दौरान देशभक्ति, शौर्य और बलिदान से जुड़े नारों से पूरा नगर गूंज उठा।

बस स्टैंड के तिरंगा चौक पर साहिबजादों की स्मृति में कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान ज्ञानी जी द्वारा अरदास की गई और साहिबजादों के अदम्य साहस, धर्मनिष्ठा और बलिदान पर प्रकाश डाला गया। महिला, पुरुषों और बच्चों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने कार्यक्रम को भावनात्मक और प्रेरणादायी बना दिया।

समाज प्रमुखों ने अपने संबोधन में कहा कि साहिबजादों का बलिदान केवल सिख समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश और मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि बहुत कम उम्र में अत्याचार के सामने झुकने से इनकार कर साहिबजादों ने धर्म, सत्य और आत्मसम्मान की रक्षा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

परमजीत कुकरेजा ने कहा कि वीर बाल दिवस हमें यह सिखाता है कि सच्चाई और न्याय के मार्ग पर चलते हुए किसी भी अन्याय के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए। वहीं आरती रोहरा ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों और युवाओं में संस्कार, साहस और देशभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं। गुरनूर कुकरेजा ने कहा कि बाइक रैली और कैंडल श्रद्धांजलि के माध्यम से समाज ने यह संदेश दिया है कि आज भी साहिबजादों के बलिदान को जीवित रखा गया है।

कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में शांति, अनुशासन और भाईचारे का वातावरण बना रहा। वीर बाल दिवस पर आयोजित यह आयोजन न केवल साहिबजादों के बलिदान की स्मृति बना, बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और राष्ट्रप्रेम को भी सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।

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