रायपुर में RTE नियम बदले, निजी स्कूलों में अब नर्सरी में RTE प्रवेश नहीं मिलेगा, केवल कक्षा 1 से दाखिला होगा, जिससे गरीब अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
रायपुर। राजधानी रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत पढ़ने वाले गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए अगले शैक्षणिक सत्र से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब निजी स्कूलों में RTE के अंतर्गत प्रवेश सीधे कक्षा 1 से ही मिलेगा। नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 में RTE के माध्यम से दाखिले की सुविधा समाप्त कर दी गई है। इस फैसले से हजारों अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है और उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अब तक प्रदेश के कई निजी स्कूलों में नर्सरी स्तर से ही RTE के तहत बच्चों को मुफ्त शिक्षा का लाभ मिल रहा था। इससे गरीब परिवारों के बच्चों को शुरुआती उम्र से ही अच्छे स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिलता था। लेकिन नए निर्देशों के बाद नर्सरी में RTE से प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसका सीधा असर यह होगा कि यदि अभिभावक अपने बच्चे को नर्सरी में निजी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें पूरी फीस खुद वहन करनी होगी।
शिक्षा विभाग का तर्क है कि RTE अधिनियम के मूल प्रावधानों के अनुसार मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा कक्षा 1 से लागू होती है। नर्सरी और प्री-प्राइमरी शिक्षा को RTE के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इसी आधार पर यह निर्णय लिया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इससे नियमों में एकरूपता आएगी और स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया भी सरल होगी।
हालांकि, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नर्सरी की पढ़ाई आज के समय में बेहद जरूरी हो गई है और यहीं से बच्चे की शैक्षणिक नींव तैयार होती है। नर्सरी में दाखिला न मिलने से गरीब बच्चों को शुरुआती शिक्षा में ही पिछड़ने का खतरा रहेगा।
निजी स्कूल संचालकों का भी मानना है कि कक्षा 1 से पहले बच्चों का स्कूल वातावरण से परिचित होना जरूरी है। ऐसे में RTE से नर्सरी में प्रवेश बंद करना व्यवहारिक नहीं है। कई अभिभावकों ने मांग की है कि सरकार या तो नर्सरी को भी RTE के अंतर्गत शामिल करे या फिर गरीब बच्चों के लिए कोई वैकल्पिक योजना लाए।
फिलहाल, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी सत्र से RTE के तहत दाखिला केवल कक्षा 1 में ही होगा। इससे जहां सरकारी नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ना तय मानी जा रही हैं।





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