उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने वाराणसी में छात्राओं को लिव-इन रिलेशनशिप से बचने की सलाह दी, कहा— “ऐसे रिश्ते भविष्य के लिए सही नहीं।”
वाराणसी। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एक बार फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के 47वें दीक्षांत समारोह में उन्होंने छात्राओं को लिव-इन रिलेशनशिप से दूर रहने की सलाह दी।
राज्यपाल का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और देशभर में इस पर बहस छिड़ गई है।
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में राज्यपाल ने भावुक होते हुए कहा—
“बेटियों से एक ही बात कहूंगी, लिव-इन रिलेशन मत करिए, मत करिए। अपने जीवन का निर्णय स्वयं करिए। देखा है ना, 50-50 टुकड़े होते हैं। पिछले दस दिनों में ऐसी कई घटनाओं की जानकारी मिली है। बेटियां ऐसी गलतियां क्यों करती हैं, देखकर दुख होता है।”
यह पहली बार था जब काशी विद्यापीठ का दीक्षांत समारोह कैंपस के बाहर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में कुल 55,642 स्नातक छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं — जिनमें 34,252 छात्राएं और 21,387 छात्र शामिल थे। इसके अलावा, 15,321 स्नातकोत्तर छात्रों (जिनमें बड़ी संख्या महिलाएं थीं) को उपाधियां दी गईं।
राज्यपाल ने 178 शोधार्थियों को पीएचडी और 101 मेधावी छात्रों को 103 स्वर्ण पदक प्रदान किए। मुख्य अतिथि के रूप में पद्मश्री प्रो. सरोज चूड़ामणि (AIIMS, नई दिल्ली) उपस्थित रहीं।
महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध पर चिंता
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने भाषण में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और शोषण की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उन्होंने हाल ही में 40 बेटियों से व्यक्तिगत मुलाकात की, जिनमें से चार ने खुलासा किया कि उनके ही परिजन — पिता, मामा, काका या पड़ोसी — ने उनका यौन शोषण किया।
उन्होंने कहा —
“इन बेटियों ने हिम्मत दिखाई, पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई और अब अपराधी जेल में हैं। ऐसे मामले समाज के लिए शर्मनाक हैं। पॉक्सो एक्ट के बावजूद ऐसी घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं।”
“लिव-इन रिश्ता आम खाने जैसा” — राज्यपाल
राज्यपाल ने अपने भाषण में लिव-इन रिलेशनशिप की तुलना “आम खाने” से की। उन्होंने कहा —
“आज के युवा रिश्तों को फल की तरह चखते हैं और फिर गुठली छोड़ देते हैं। लेकिन याद रखिए, गुठली ही बीज बनती है — यानी परिणाम। लिव-इन रिश्ते में लड़कियां शोषण की शिकार होती हैं, खासकर 15 से 20 साल की उम्र में जब वे भावनात्मक रूप से कमजोर होती हैं।”
उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसे रिश्तों में फंसते हैं, उनके जीवन में गहरे घाव रह जाते हैं।
उन्होंने अनाथालयों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां जाकर लिव-इन रिलेशनशिप के दर्दनाक परिणामों को देखा जा सकता है — जहां कई बच्चियां समाज के डर से औरों की छाया में जीती हैं।
यह पहला बयान नहीं
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस विषय पर पहले भी चिंता व्यक्त की थी। कुछ ही सप्ताह पहले बलिया के जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षांत समारोह में भी उन्होंने छात्राओं को ऐसे रिश्तों से सावधान रहने की नसीहत दी थी।
उन्होंने कहा था —
“लिव-इन के नाम पर धोखा और अपराध बढ़ रहे हैं। बेटियों को समझना होगा कि आधुनिकता का मतलब अंधी नकल नहीं है।”
सोशल मीडिया पर मची बहस
राज्यपाल का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होते ही दो पक्षों में बंट गया।
एक ओर लोग इसे “मातृत्वपूर्ण सलाह” बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसे “महिलाओं की स्वतंत्रता पर अंकुश” कहा है।
ट्विटर (अब एक्स) पर #AnandibenPatel और #LiveInRelationship हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा —
“राज्यपाल जी ने सही कहा, आज रिश्तों में भावनाओं की जगह स्वार्थ ने ले ली है।”
वहीं, एक महिला कार्यकर्ता ने टिप्पणी की —
“महिलाओं को डराने की बजाय उन्हें सशक्त बनाने पर ध्यान दें। शिक्षा और कानूनी सुरक्षा ही असली समाधान है।”
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं
राजनीतिक दलों ने भी इस बयान पर प्रतिक्रिया दी है।
समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा —
“ऐसे बयान महिलाओं की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हैं। लड़कियों को फैसले लेने का अधिकार है, नसीहत नहीं।”
वहीं भाजपा समर्थकों ने राज्यपाल के बयान को “मातृत्व और नैतिकता से भरी चेतावनी” बताया।
एक भाजपा प्रवक्ता ने कहा —
“आनंदीबेन पटेल ने जो कहा, वह एक मां की चिंता है। समाज में बढ़ते अपराधों और रिश्तों के पतन को देखते हुए यह बयान प्रासंगिक है।”
युवाओं में मिश्रित प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं में भी इस मुद्दे को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया रही।
कुछ छात्राओं ने कहा कि राज्यपाल ने सही कहा क्योंकि ऐसे रिश्तों से कई बार मानसिक और सामाजिक नुकसान होते हैं।
वहीं कुछ युवाओं ने कहा कि “हर रिश्ता एक जैसा नहीं होता, यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता का विषय है।”
समाज और आधुनिकता के बीच टकराव
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का यह बयान उस समय आया है जब समाज में आधुनिक रिश्तों को लेकर व्यापक बदलाव देखे जा रहे हैं।
भारत में लिव-इन रिलेशनशिप कानूनी रूप से अपराध नहीं, लेकिन सामाजिक दृष्टि से इसे अब भी संदेह और आलोचना की नजर से देखा जाता है।
आनंदीबेन पटेल का संदेश पारंपरिक और आधुनिक मूल्यों के बीच चल रहे संघर्ष को भी उजागर करता है।
महिलाओं की सुरक्षा पर फोकस
राज्यपाल ने कहा कि सरकार और समाज दोनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाएं सुरक्षित रहें और किसी प्रकार के शोषण का शिकार न हों।
उन्होंने छात्राओं से कहा —
“अपने निर्णय खुद लें, लेकिन सोच-समझकर। जीवन की दिशा भावनाओं से नहीं, विवेक से तय होती है।”
संक्षेप में, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का यह बयान सिर्फ एक दीक्षांत समारोह की सलाह नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश है।
उन्होंने जिस स्पष्टता और भावनात्मकता से बेटियों को संबोधित किया, उसने देशभर में चर्चा छेड़ दी है।
अब सवाल यह है कि क्या यह संदेश युवाओं को सोचने पर मजबूर करेगा या यह एक और बहस बनकर रह जाएगा — इसका जवाब आने वाले समय में मिलेगा।
